सूबे में फर्जी शिक्षक नियोजन के मामले में पटना हाई कोर्ट ने जनहित याचिका सीडब्लूजेसी न. 15459/2014 की सुनवाई करते हुए 18 मई 2015 को यह आदेश पारित किया है की वर्ष 2006 से अबतक जितनी भी सर्वशिक्षा अभियान के तहत फर्जी तरीके से नियुक्ति हुई है।उसकी जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारी करेंगे। पटना हाई कोर्ट का यह फैसला स्वागत के योग्य है।

लेकिन आपको बता दे की जमुई में आठ वर्ष पुर्व से ही 126 ऐसे फर्जी शिक्षकों का मामला आरक्षी निरीक्षक, मंत्रिमंडल (निगरानी) अन्वेशन ब्यूरो,भागलपुर के यहां आजतक लंबित है। भले ही उक्त महकमे के अधिकारी के पत्रांक और दिनांक का हवाला देकर शिक्षा महकमे के अधिकारियों ने, कहा जा रहा है कि मोटी राशि की वसूली की।

एक ही शिक्षक जमुई और नवादा में नौकरी करते रहे और जिला शिक्षा अधीक्षक ,जमुई पत्रांक 2590, दिनांक 7-10-2007 का हवाला देकर लीपा-पोती करते रहे। शिक्षक नियोजन के प्रथम चरण में अलीगंज प्रखंड में मुखिया और पंचायत सचिव ने जमकर धांधली की।मामला सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरवार में पहुँची।जहां तत्कालीन प्रधान सचिव, मानव संसाधन विभाग, अंजनी कुमार सिंह ने दोषी लोगो के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश तत्कालीन डीएम, रामशोभित पासवान को दी।डीएम साहब ने तत्कालीन डीएसई बी,एन,झा को अनुपालन के लिए कहा।डीएसई ने तत्कालीन बीडीओ किशोरी पासवान को प्राथमिकी करने का निर्देश दिया। लेकिन आरोप लगाये गये कि कार्रवाई के एवज में मोटी वसूली करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

उस वक्त खुद डीएसई बीएन झा ने गड़बड़ी को पकड़ा था। कार्रवाई करने की बात कही थी।परंतु कुछ नहीं हुआ।आज ये यहाँ जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर यहां फिर से पदस्थापित है।जिले के फर्जी शिक्षक नियोजन की जानकारी इनसे ज्यादा किसी को शायद नहीं है। पिछले दिनों जिला परिषद् से 40 शिक्षको की नियुक्ति हुई है।जिसमें फर्जीवाड़ा जमकर हुई है। वेतन बंद करना और फिर से भुगतान चालू कर देना वसूली का नायाब तरीका है।ऐसे में उपर्युक्त जांच में यह आरोपित अधिकारी कहाँ तक निष्पक्ष रहेंगे।यह चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन अब फर्जी शिक्षको की टोली इनके इर्द-गिर्द मामले की लीपा पोती करवाने में सक्रिय है.

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