बिहार ने देश को सदा ही सकारात्मक राह दिखा कर राजनीति की नयी दिशा तय की है। बिहार को defame करने की असफल कोशिश करने वाली मित्र-मण्डली के लोग विधानसभा चुनाव की ऐतिहासिक हार से शायद उबर भी नहीं पाए होंगे कि फिर से अपने चिर परिचित ढर्रे पर चल पड़े हैं | जंगलराज- जंगलराज के कसीदे पढ़ने के लिए देश के प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री तक बिहार में आयात किए गए | एक से बढ़कर एक ‘चाणक्य’ और रणनीतिकार चुनावी महासमर में जंगलराज का जुमला भुनाने के लिए उतारे गए | बेतहाशा धनबल, बाहुबल, साम्प्रदायिकता से लबरेज़ छल और चकाचौंध – जाने क्या कुछ उढ़ेल नहीं दिया गया बिहार के इस विधानसभा चुनाव में ? पर नतीज़ा ? – शून्य | बिहार की जनता ने इतिहास रचते हुए लगभग 75 फीसदी विधानसभा सीटों पर महागठबंधन और उसकी जनहितकारी और समावेशी नीतियों को ही चुना | जंगलराज के जुमले को बिहार की जनता ने अपना अपमान माना और लम्बे समय से बिहार की जनता को इस अपमानजनक उपाधी से नवाज़ने वालों को उनका सही स्थान दिखा दिया | बिहार की बौद्धिक एवं न्यायप्रिय जनता ने बीजेपी द्वारा बिहार को जंगलराज कह कर देश भर में दुष्प्रचारित करने की कोशिश को नाकाम करते हुए ये बता दिया कि बिहार के सच्चे हितैषी कौन है और उनको पूर्ण बहुमत के साथ बिहार की सत्ता सौंप दी।

एक कहावत है कि दूध का जला छाछ भी फूँक फूँक कर पीता है | पर NDA के नेता किसी और ही मिट्टी से बने हैं | नकारात्मक चुनाव प्रचार के कारण हारे ये राजनीति के तथाकथित दिग्गज हार के बाद भी कोई सबक लेने से साफ इंकार कर रहे हैं | मैंने अब तक की अपनी रजनीति से यही सबक लिया है कि जो जनता के मर्ज़ के सही नब्ज़ को पकड़ ले, सच्चा राजनेता वही है | ज़मीन, मजदुर, किसान और गरीब से कटे NDA के हवा हवाई नेता जनता के मनोभाव को कभी भी समझ नहीं पाते हैं | और अगर वे ऐसा कर पाते तो जान जाते कि बिहार की जनता को जंगलराज के आधारहीन एवं तथ्यहीन जुमले से किस सीमा तक चिढ़ है | इससे ना सिर्फ ब्रांड बिहार की मानहानि होती है बल्कि कॉर्पोरेट से लेकर अप्रवासी बिहारी तक बिहार में पूंजी निवेश करने से कतराने लगते हैं | अपनी गर्त में जाती राजनीति को पुनः चमकाने के लिए छिछले आरोपों द्वारा ब्रांड बिहार के चमक को कुरेद कुरेद कर परत दर परत उतारने का प्रयास करना कितना सही है? ऐसी अपरिपक्व एवं नकारात्मक राजनीति से हानि बिहार के मान की होती है, बिहार की जनता की होती है |

निजी स्वार्थों से प्रेरित होकर विभिन्न प्रभावशाली वर्ग अपने समर्थित संगठनों से अपने-अपने स्तर पर यह प्रचारित करने में लीन हो गए हैं कि बिहार में अपराध तेज़ी से बढ़ रहा है | सनसनी पैदा करने के लिए आपसी सम्पत्ति विवाद, पारिवारिक रंजिश इत्यादि के कारण होने वाली हत्याओं की असली वजह छुपाकर इस प्रकार पेश किया जाता है कि जैसे वे संगठित अपराध का हिस्सा हों और उसे सरकार का संरक्षण प्राप्त हो? एक ही अपराध को अलग अलग चश्मों से दिखाने का प्रयास किया जाता है | घड़ियाली आँसू बहाकर राजनीति चमकाई जाती है | पुलिस द्वारा कार्रवाई को जानबूझ कर या तो प्रकाशित ही नहीं किया जाता है या फिर उसे कमतर आँका जाता है |

नकारात्मक राजनीति और सनसनी पैदा करने की नीतियों को जनता दो माह पूर्व नकार ही चुकी है, पांच वर्ष पश्चात भी पुनः नकार देगी, इसे लेकर वे पूरी तरह आश्वस्त रहें | और विपक्ष में जिन्हें अपनी ‘ प्रशासनिक प्रतिभा’ को लेकर ज्यादा ही विश्वास है, वे इसे केंद्र में आजमाएँ जहाँ कुशल प्रशासकों का घोर अभाव है वैसे भी देश की राजधानी दिल्ली जहाँ की कानून व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन है वहां अपराध दर क्या है ये किसी से छिपा नहीं है अगर विपक्षी कहेंगे तो उनको आँकड़े उपलब्ध करवा सकता हूँ। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि देश के सुरक्षा ठिकानों पर आतंकी हमले हो रहे है, पुलिस अधीक्षक का अपहरण हो जाता है, मेरे देश की माटी पर बार-बार पाकिस्तानी झंडे फहराये जा रहे है. अब मैं बगैर राजनीति किये ईमानदारी से पूछना चाहता हूँ क्या ऐसी कुछेक घटना होने के कारण देश में जंगलराज है? अगर बिहार में कुछेक ऐसी घटना होने के कारण यहाँ जंगलराज है तो फिर देश में भी जंगलराज एवं आंतकराज होना चाहिये| माननीय भाजपाईयो जंगलराज की परिभाषा आपकी सहूलियत से नहीं होगी? बिहार में नकारात्मक राजनीति के दिन अब लद गए हैं |

बिहार चुनाव में जनता से मिले आशातीत विश्वास को लेकर हम आत्ममुग्ध होकर बैठे नहीं हैं | हम सभी चुनौतियों को समझते ही नहीं पहचानते भी है. बिहार सरकार ने चंद दिनों में ही अपनी कार्यशैली और कुशलता से विकास के समावेशी एजेंडे को आगे बढ़ाया है | बहुत ही कम समय में दूरदर्शी सोच के साथ समाजोपयोगी निर्णय लिए हैं जो मील के पत्थर साबित होंगे | हम विपक्ष से कतई यह उम्मीद नहीं करते हैं कि वे हमारे कार्यों का बखान करें या हमारी प्रशंसा के कसीदे पढ़ें | पर लगता है विपक्ष ने अपने विपक्ष के शाब्दिक अर्थ को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया है | विरोधी पक्ष का कतई यह अर्थ नहीं है कि वे हर मुद्दे पर बेवजह विरोध ही करें |

आकड़ों के हिसाब से बिहार में अपराध भाजपा शासित अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत कम है जबकि बिहार की जनसंख्या उन राज्यों से कहीं ज्यादा है | यही नहीं आंकड़े साफ साफ दिखाते हैं कि बिहार में अपराध में कोई उछाल आया हो, ऐसा भी कुछ नहीं है | बस जनता की आँखों में बढ़ा चढ़ाकर ज्यादा परोसा जाने लगा है | बीजेपी को अब ये अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि खाली हैडलाइन मैनेज करने मात्र से वो अब पक्ष एवं विपक्ष में सर्वाइव नहीं कर सकते। अब हक़ीक़त जनता के समक्ष रखने के लिए और भी स्वतंत्र माध्यम है. शेष मैं जनता की बुद्धिमत्ता पर छोड़ देना ज्यादा उचित समझता हूँ | और जो पूरे समाज को साथ लेकर चलने के बजाय कुछ प्रतिशत के हितों को ही सोचेंगे, जनता उन्हें पुनः जवाब देगी |

बिहार विकास का नया इतिहास रचने का इच्छुक है और यकीन मानिए कि दुगने वेग से बढ़ने के लिए पूरे उत्साह से एक निर्णायक मुहाने पर भी खड़ा है और इस दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है जहाँ जातिगत विद्वेष से प्रेरित नकारात्मक राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं है | हम बिहार के विकास को लेकर पूर्णरूप से कटिबद्ध है एवं बिहार के करोड़ों नौजवानों के सपनों के अनुरूप नये बिहार का निर्माण करना है। विपक्ष के वो लोग नकारात्मक सोच और इतिहास की राजनीति को कुरेदने पर आमदा हैं, बिहार की जनता उन्हें इतिहास की वस्तु बनाने पर विवश होगी | मेरी शुभकामनाएँ उनके साथ हैं |Tejashwi-yadav

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