कानपुर। हमारा इतिहास रहा है कि यहां के लोग एक ही सत्य को मानते है वह है मानवता, भाईचारा व एकता। कभी-कभी लोग भूल जाते है उन्ही को याद दिलाने के लिए मैं आशा यात्रा निकाल रहा हूॅं। यह कहना है आध्यात्मिक गुरू श्रीएम का। इसके साथ ही शहरवासियों का अटूट प्रेम देखते हुए कहा कि अब तक की यात्रा में मुझे पहली बार इतना प्यार मिल रहा है।

आध्यात्मिक गुरू, समाज सुधारक व शिक्षाविद् श्रीएम की आशा यात्रा मंगलवार
को जैसे ही फूलबाग से शुरू हुई तो सड़क के किनारे खड़े स्कूली बच्चें उनके स्वागत के लिए फूल मालाओं की वर्षा शुरू कर दी। बच्चों का यह प्रेम देख गुरू कभी बच्चों को दुलारते तो कभी उन्हें गले लगाते। जगह-जगह स्कूली बच्चें स्टेज पर देश प्रेम की धुन में ठुमकते रहे। यात्रा ज्यों-ज्योंआगे बढ़ती गई बच्चे व  शहरवासी उनके स्वागत के लिए लगातार फूल बरसाते रहे।

हर जगह आध्यात्मिक गुरू बच्चों को एक ही संदेश देते रहे कि भविष्य आपके
हाथ में है आपको ही इस संदेश को आगे बढ़ाना है। करीब पौने दो घंटे की यात्रा के बाद गुरू 12ः30 बजे ग्रीन पार्क स्टेडियम मंच पर पंहुचे। जंहा पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। आध्यात्मिक गुरू व मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से सफेद कबूतर व गुब्बारे उड़ाकर शांति का संदेश दिया।

मंच से आध्यात्मिक गुरू
आध्यात्मिक गुुरू श्रीएम सभी लोगों का धन्यवाद देते हुए कहा कि पद यात्रा
ही हमारा संदेश है। इसे समझने की जरूरत है। इसके बाद उन्होंने अपना परिचय
देते हुए कहा कि मेरा जन्म तिरूवन्तपुरम् के मुस्लिम परिवार में हुआ है।
उस समय मेरा नाम मुमताज अली खान रखा गया।

19 वर्ष की आयु में मेरी भेंट नाथ संप्रदाय के गुरू महेश्वर दास से हुई और करीब चार वर्ष तक उनके साथ रहकर एकता, मानवता व सद्भावना की सीख ली। इसके बाद गुरू ने मेरा नाम मधुकर नाथ रख दिया। लेकिन मैं बाद में अपना नाम एम इसलिए रख लिया कि मैं केवल मानव हॅूं। श्री तो लोग संबोधन के लिए लिख देते है।

यात्रा के विषय में
ंश्रीएम ने बताया कि भारत का इतिहास रहा है कि यहां के लोगों ने मानवता,
एकता व भाईचारा का जो संदेश दिया है उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई
देती है। कभी-कभी लोग भूल जाते है उनको याद दिलाने के लिए यह यात्रा शुरू
की जा रही है।
इसीलिए स्वामी विवेकानन्द के जन्म दिन 12 जनवरी 2015 से तीन सागरों के संगम कन्याकुमारी से शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि यात्रा में नया कुछ नहीं है अपने महापुरूषों के संदेश को आगे बढ़ा रहें है। इसके साथ ही सभी शहरवासियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब तक की यात्रा में मुझे पहली बार इतना प्यार मिला है। मुझे उम्मीद है कि कानपुर के लोग इस यात्रा के उद्देश्यों को पूरा करेंगें। अंत में ऊॅं शांति-ऊॅं शांति के संबोधन को समाप्त किया।

मुख्यमंत्री का कहना
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आध्यात्मिक गुरू को आभार व्यक्त
करते हुए कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं का देश है ऐसा दुनिया में कहीं नहीं
है। देश को एकता, मानवता व भाईचारे को मजबूत बनाने के लिए ऐसी यात्रा से
ज्यादा कोई और तरीका नहीं है।

सीएम ने आगे कहा कि यात्रा के जरिए ही लोगों के बीच संदेश पहुंचाया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने फ्रांस के दो युवकों का जिक्र किया जो जल संरक्षण को बचाने के लिए बाइक से इन दिनों 25 हजार किलोमीटर की यात्रा पर निकले है और मौजूदा समय में भारत में उनकी यात्रा चल रही है। इस मौके पर सीएम द्वारा आध्यात्मिक गुरू को जिला प्रशासन की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर शांति व सद्भावना यात्रा निकाले जाने की बधाई दी।ca205577-1042-4dff-9e18-81e77b2abb1c

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