फतेहपुर। गुटो में भड़की हिंसा ने जहांनाबाद को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। इस हिंसा के जितने जिम्मेदार दोनों समुदायों के लोग जिम्मेदार हैं, उतना ही जिम्मेदार स्थानीय पुलिस प्रशासन भी है। तो क्या लापरवाही बरतने वाली पुलिस पर कोई कार्रवाई होगी या फिर लकीर के फकीर की तरह इस बार की कार्रवाई भी एक ऐसी दिशा में जाएगी जिससे केवल और केवल राजनैतिक निशाने साधे जायेगें।

ज्हांनाबाद वैसे ही दो समुदायों को लेकर चर्चा में रहता है। ऐसे में अगर इलाके में बड़ा कार्यक्रम होने की वजह से पुलिस को भारी पुलिस बल की तैनाती करनी चाहिए थी। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही की गई। न तो बहुसंख्यक समुदाय द्वारा किए जाने वाले इस कार्यक्रम का आंकलन ही ठीक से किया गया और न ही दूसरे समुदाय के आक्रामक होने को ही ध्यान में रखा गया। अगर जिला प्रशासन ने इन दोनों बातों को ध्यान में रखा होता तो शायद ऐसी घटना नहीं होती और सब कुछ शांतपिूर्ण तरीके से निपट सकता था।

लेकिन जिला प्रशासन ने इस कार्यक्रम को बहुत ही हल्के रूप में लिया और एक बड़ी घटना हो गई। यह कुछ और नहीं बल्कि पुलिस लापरवाही का नतीजा है। इस मामले में जिले का खुफिया विभाग भी दूसरे समुदाय की तैयारियों का पता नहीं लगा सका था। अगर खुफिया विभाग ने समय रहते इसका पता लगा लिया होता तो तैयारी भी पूर्ण हो गई होती।9d9bc4e2-0c63-4e66-9379-95f996218fb7

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