नीतीश सरकार ने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनके दोनों बेटों के खिलाफ आरजेडी के बिहार बंद के दौरान दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है. पटना की जिला अदालत ने बुधवार को इन नेताओं सहित 263 आरजेडी कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामला वापस लेने संबंधी सरकार की अर्जी को मंजूरी दे दी है. दरअसल, 27 जुलाई 2015 को आरजेडी ने केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना के आंकड़े न जारी करने के विरोध मे बिहार बंद का आयोजन किया था. इस बंद के दौरान हुए उपद्रव और प्रदर्शनों से नागरिकों सहित हाईकोर्ट के कई जजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा था. इसके बाद इस मामले में खुद पटना हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था. पुलिस ने लालू और उनके समर्थकों के खिलाफ दंगे भड़काने, जानबूझकर लोगों को चोट पहुंचाने और सरकारी कर्मचारी को काम करने से रोकने संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया था.

उधर, सरकार के इस फैसले से भड़की भाजपा ने इसे हाईकोर्ट की आवमानना बताया है. भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने कहा कि नीतीश सरकार ने इन मुकदमों को वापस लेकर पटना हाईकोर्ट की अवमानना की है. उनका कहना है कि जब इस मामले में हाईकोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई कर रहा है तो नीतीश सरकार को बताना चाहिए कि क्या उसने केस वापस लेने के पहले हाईकोर्ट से अनुमति ली थी. मोदी ने आरेाप लगाया कि नीतीश कुमार ने लालू के दबाव में आकर ये फैसला लिया है.Lalu-Yadav-and-Nitish-Kumar-800x400

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