नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बाद संयुक्त राष्ट्र ने भी अगले दो साल तक भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर दुनिया में सबसे तेज रहने का अनुमान व्यक्त किया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से शुक्रवार को जारी रिपोर्ट \’वैश्विक आर्थिक परिस्थिति एवं परिदृश्य\’ में कहा गया है कि वर्ष 2016 में भारत की विकास दर 7.3 प्रतिशत तथा 2017 में 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वर्ष 2015 में यह 7.2 फीसदी रही थी।

आईएमएफ ने 2016 और 2017 दोनों में इसके 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जारी किया था। रिपोर्ट के अनुसार, \’बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाले देश होगा। देश में वृहद आर्थिक वातावरण में सुधार हुआ है। इसमें कच्चा तेल, धातु और खाद्यान्नों की कीमतों में गिरावट का काफी योगदान रहा है। सुधार उपायों को लागू करने में सरकार के सामने पेश आ रही दिक्कतों के बावजूद उपभोक्ताओं और निवेशकों का विश्वास बढ़ा है, हालांकि औद्योगिक उत्पादन जैसे कुछ मानकों में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।\’

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एशिया-प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र के सामाजिक एवं आर्थिक आयोग (यूएन-इस्केप) के प्रमुख एवं अर्थशास्त्री डॉ. नगेश कुमार ने कहा कि भारत आठ से नौ प्रतिशत की विकास दर हासिल करने की क्षमता रखता है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक सुधारों में देरी और कम मजदूरी वाले रोजगारों की उच्च दर तथा रोजगार में बड़े पैमाने पर ङ्क्षलगभेद के कारण यह अपनी पूरी क्षमता से विकास नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि और सेवा क्षेत्र के कुछ उपक्षेत्रों की कम उत्पादकता भी इसमें बाधा है।

उन्होंने वित्तीय सुधारों के जरिए राजस्व संग्रह बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। रिपोर्ट में इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था के 2.9 प्रतिशत तथा अगले साल 3.2 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान जताया गया है, जबकि दक्षिण एशिया का विकास अनुमान 2016 में 6.7 प्रतिशत तथा 2017 में सात प्रतिशत पर रखा गया है। इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था का योगदान सबसे ज्यादा होगा जिसकी दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्था में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति उम्मीद का कारण पूछे जाने पर डॉ. नगेश ने कहा कि 2016 और 2017 के दौरान रुके हुए नीतिगत सुधारों के लागू होने की आशा है। इसके अलावा कच्चा तेल की कीमतों में जारी गिरावट के कारण दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में से एक भारत लाभ की स्थिति में रहेगा। उन्होंने कहा कि अभी कच्चे तेल के दाम में बढ़त मुश्किल दिखती है और अगले कुछ साल तक इसके दाम 30 डॉलर प्रति बैरल आसपास बने रहने की संभावना है। इससे सरकार को सब्सिडी पर होने वाली बचत को सामाजिक विकास के मद में खर्च करने का मौका मिला है।

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