बिहार में सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33.95 फीसदी आरक्षण का ऐलान नीतीश कुमार के लिए अपना कद बढ़ाने के साथ-साथ राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने की कवायद भी है.

बिहार से इन दिनों अक्सर नकारात्मकता की धुंध से भरी खबरें ही आ रही हैं. दरभंगा हत्याकांड के बाद से जो सिलसिला शुरू हुआ, तब से बिहार के बारे में छपने वाली सुर्खियों में हत्या, लूट जैसी घटनाओं का ही जिक्र हो रहा था. दो सप्ताह पहले पुर्णिया की हिंसा ने बिहार की किरकिरी करवाई तो चार दिनों से उसी पुर्णिया की विधायक के बाहुबली पति अवधेश मंडल के थाने से फरार हो जाने की खबर ने.

लेकिन इस सबके बीच बिहार से एक अच्छी खबर भी निकली है. दूसरों के लिए नजीर स्थापित करते हुए सूबे के मुखिया नीतीश कुमार ने घोषणा कर दी है कि प्रदेश में अब सभी सरकारी नौकरियों में 33.95 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. यह आरक्षण उस तीन प्रतिशत आरक्षण के अतिरिक्त होगा, जो बिहार में पहले से ही पिछड़ी जाति की महिलाओं को दिया जा रहा था. यानी कुल मिला दें तो करीब 37 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई हैं.

इस फैसले को एक बड़ा कदम माना जा रहा है. यह अलग बात है कि बिहार में इन दिनों बढ़ती आपराधिक घटनाओं से सरकार की चौतरफा किरकिरी के बीच इस पर उस तरह से बात नहीं हो सकी.

नीतीश कुमार ने कैबिनेट में इस फैसले मुहर लगवाकर अपना चुनावी वादा तो पूरा किया ही है, देश में महिलाओं को आरक्षण देने के मामले में में अव्वल राज्यों की श्रेणी में बिहार को भी शामिल कर दिया है. गुजरात में अभी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण कोटा है जबकि मध्यप्रदेश और कर्नाटक में भी 33 प्रतिशत तक ही कोटा निर्धारित है.

यहां यह जान लेना भी जरूरी है कि बिहार में नीतीश कुमार के सौजन्य से पहले से ही महिलाओं को कई जगह आरक्षण का प्रावधान रहा है. पंचायत चुनाव में 50, पुलिस की नौकरी में 35 और शिक्षक नियोजन में 50 फीसदी कोटा पहले ही महिलाओं के लिए आरक्षित है. साथ ही अन्य तमाम नौकरियों में ओबीसी महिलाओं के लिए तीन प्रतिशत कोटा भी पहले से निर्धारित रहा है. नीतीश कुमार के इस फैसले को एक बड़ा कदम माना जा रहा है. यह अलग बात है कि बिहार में इन दिनों बढ़ती आपराधिक घटनाओं से सरकार की चौतरफा हो रही फजीहत के बीच इस खबर पर उस तरह से बात नहीं हो सकी.nitish-kumar2-800x400

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