कानपुर। शहर में तत्कालीन डीएम रोशन जैकब के तमाम प्रोजेक्ट तबादला होने के बाद धरासाई हो गए। इसी तरह आईजी जोन आशुतोष पाण्डेय ने भी अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए सोशल नेटवर्किगं के जरिए कई प्राजेक्टों की शुरूआत की थी। जिसका परिणाम भी जनता के सामने दिखाई देने लगा था। उनके तबादले के बाद से शहरवासियों के मन में सवाल उठने लगा है कि कहीं रोशन जैकब जैसे ही उनके प्राजेक्ट कागजों तक सीमित न रह जाय।

19 जून 2014 को कानपुर आईजी जोन का चार्ज लेने वाले आशुतोष पाण्डेय ने जोन पुलिसिंग पर नए-नए प्रयोग किए। एक तरफ जहां थानों पर जाकर जनता की शिकायतें सुनते थे तो वहीं दूसरी तरफ पुलिस के अक्सर पेंच कसते देखे जाते थे। इसके साथ ही सोशल मीडिया से शिकायतें लेकर उनकी समस्याओं को हल करने की शुरूआत की थी। छोटे-मोटे अपराध जिनका मुकदमा लिखने से पुलिस परहेज करती उनको दर्ज कराने के लिए 15 अप्रैल 2015 को एक नंबर भरोसे का नाम से हेल्पलाइन की शुरूआत की।

जिसे बाद में जोन के सभी जिलों में लागू कर दिया गया था। इस नंबर से लोगों को बहुत राहत मिलती थी। जोन में रोजाना 250 से 300 शिकायतों का निस्तारण किया जाता रहा। महिलाओं के लिए भी हेल्पलाइन नंबर की शुरूआत की थी। अभी हाल ही के दिनों में शहर की बिगड़ी ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर गंभीर दिखे और सेल्फी विद ट्रैफिक अभियान की शुरूआत कर डाली। लेकिन इसके परिणाम आने से पहले ही उनका तबादला हो गया। इन्ही अभियानों को देखते हुए जनता अब नए आईजी जकी अहमद से उम्मीद लगाए बैठी है कि उनके अभियानों को निरंतर चालू रखा जाय।

अब देखना यह होगा कि उनके अभियान चालू रहते हैं या फिर अधर में लटक जाएंगें।
फाइलों में दब जाते है अभियान शहर में अधिकारी तो आते जाते ही रहते है लेकिन सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि जनता के हित पर होने वाले काम अधिकारी के तबादले के बाद फाइलों तक सीमित रह जाते है। उदाहरण के तौर पर तत्कालीन डीएम रोशन जैकब ने महिलाओं के लिए शक्ति दिवस का प्रारंभ किया था।

1f9e21b5-cc20-4cce-b4f9-a353fa783f30

LEAVE A REPLY