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(शैलेश कुमार पाण्डेय )

  • वहीं हिंदुओं के घरों के बच्चे वेद से दूर होते जा रहे हैं

गोपालगंज। जिले के कुचायकोट में बेशक पूरे देश में संस्कृत की पढ़ाई के प्रति युवाओं में रुचि घटती जा रही है। वहीं हिंदुओं के घरों के बच्चे वेद से दूर होते जा रहे हैं, लेकिन जिले में कुथ ऐसी मुस्लिम लड़कियां भी हैं जिनकी जुबां से देववाणी गूंज रही है। जिले में वेद और ऋचाओं की गूंज से मिठास घुल रही है।जानकारी के अनुसार यूपी की सीमा पर स्थित गोपालगंज जिले का राधा कृष्ण संस्कृत हाइस्कूल, बथनाकुटी में हिंदुओं से अधिक मुसलिम युवतियां संस्कृत की पढ़ाई कर रही हैं। इनके परिजनों ने पहले तो विरोध किया, लेकिन आज वे स्वयं इसके लिए उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं।गोपालगंज में वैसे तो संस्कृत के कुल छह हाइस्कूल हैं, जबकि हथुआ में शास्त्री तक की पढ़ाई होती है। यहां पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 200 तक सिमट कर रह गई है। दूसरी तरफ कुचायकोट प्रखंड के बथनाकुटी स्थित संस्कृत हाइस्कूल में पहुंचते ही अलग अनुभूति होती है।यहां कुल 116 विद्यार्थी इस बार मध्यमा की परीक्षा देंगे, जिनमें 86 मुसलिम लड़कियां हैं। संस्कृत के श्लोक, वंदना, स्तुति इनकी जुबान पर रहती है। इनका कहना है कि “मैं संस्कृत की पढ़ाई कर अपने कैरियर में कुछ अलग करने का सपना रखती हूं । बथना की रजिया सुल्तान ने कहा कि उर्दू पढ़ने के लिए परिवार के लोगों का दबाव था।रजिया ने बताया कि “मैं रेडियो पर संस्कृत का समाचार सुनती थी, मुझे संस्कृत पढ़ना अच्छा लगा। इसलिए मैं संस्कृत से आचार्य और ज्योतिष में पीएचडी करना चाहती हूं। ठीक इसी तरह नरहवां की रेहाना ने बताया कि उनके खालू ने सुझाव दिया था कि संस्कृत की पढ़ाई करना। इसके बाद मैंने जिद करके संस्कृत पढ़ने के लिए परिजनों को राजी किया।इस स्कूल के मुस्लिम छात्राओं ने सामूहिक रूप से कहा कि संस्कृत न सिर्फ देववाणी है, बल्कि भारतीय संस्कृति को भी सुसज्जित करती है।

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