जम्मू-कश्मीर में जम्मू विश्वविद्यालय से हासिल बीएड की डिग्री को बिहार में सेकंडरी / सीनियर सेकंडरी शिक्षकों के पदों पर मान्यता न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने यह नोटिस 25 छात्रों की याचिका पर शुक्रवार को जारी कर मामले को अशेष कुमार और संजय कुमार सिंह की याचिकाओं के साथ नत्थी कर दिया। इन छात्रों के साथ सौ छात्रों ने गत सितंबर में यह मामला शीर्ष कोर्ट में उठाया था, जिसके बाद कोर्ट ने बिहार सरकार को नोटिस जारी किया था। जम्मू विवि से बीएड इन छात्रों को बिहार सरकार ने राज्य में शिक्षकों की नौकरियों के लिए अयोग्य ठहराया था।

हालांकि, जस्टिस एफएम कलीफुल्ला की पीठ ने पटना हाईकोर्ट के गत अप्रैल में जारी आदेश पर रोक नहीं लगाई और न ही सरकार से यह कहा कि शिक्षकों की विज्ञापित सीटों पर भर्तियां न करें। पीठ के सामने छात्रों के वकील शाहिद अनवर ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर की बीएड डिग्री के बारे में एनसीटीई के सर्कुलर को नजरअंदाज कर दिया। 2008 में जारी स्पष्टीकरण सर्कुलर में शिक्षक शिक्षा की उच्चतम संस्था एनसीटीई ने सभी राज्यों से कहा था कि जम्मू-कश्मीर से प्राप्त डिग्री को केंद्रीय और राज्य में नौकरियों में बराबर की मान्यता दी जाए।

अधिवक्ता ने कहा कि पटना हाईकोर्ट ने गलत आधार पर याचिका खारिज की कि जब एनसीटीई कानून जम्मू-कश्मीर राज्य में लागू ही नहीं होता तो उसके सर्कुलर का क्या अर्थ हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में नेपाल के त्रिभुवन विवि से प्राप्त बीएड डिग्री को भारतीय विवि की बीएड डिग्री के समकक्ष माना गया है। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला भी दिया है। उन्होंने कहा कि 1969 में अस्तित्व में आया जम्मू विवि यूजीसी के वैध विवि की सूची में 112वें नंबर पर है और विवि की रेटिंग करने वाली राष्ट्रीय संस्था नैक (नेशनल एक्रेडीशन कौंसिल) ने उसे ‘ए’ ग्रेड विवि का दर्जा दिया है। ऐसे में उसकी डिग्री को मान्यता नहीं देना अवैध है। दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को नोटिस जारी कर दिया। सरकार के जवाब के बाद मामले की सुनवाई होगी।

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