कसडोल 30 जनवरी। शास.माध्यमिक कन्या शाला के छात्राओं को मध्यान्न भोजन के लिए करनी पड़ती है कड़ी मशक्कत। छात्राओं को जेल के कैदियों के समान झेलनी पड़ती है घोर प्रताड़ना बच्चों को लाईन में खड़े होकर ही भोजन प्राप्त करना पड़ता है वह भी मध्यान्न भोजन संचालिकाओं द्वारा एक -एक चम्मच ही चांवल व दाल ,सब्ज़ी परोसी जाती है।

        एक ओर शासन बच्चों के स्वस्थ्य को ध्यान में रखते हुए जहाँ विभिन्न तरीकों जैसे आँगनबाड़ीओं के माध्यम से गुणवत्ता वर्ष मनाने में करोड़ों खर्च कर रही है वहीँ आँगनबाड़ी एवं स्कूलों में मध्यान्न भोजन सञ्चालनकर्ताओं द्वारा लाभ कमाने के चक्कर में बच्चों के स्वस्थ्य के साथ खिड़वाड़  कर रहे हैं। एक तो बच्चों को कैदियों के समान लाइन में जल्दी -जल्दी भोजन कम मात्रा में परोसा जाता हैं वहीँ  बच्चों के बैठने की न ही कक्षा में बल्कि पुरे शाला में बच्चों के बैठने के लिए स्थान भी नहीं मिलता अगर बच्चे उचित जगह देखकर भोजन करने लगे तो शिक्षकों द्वारा उन्हें बैठने के  लिए मना कर दिया जाता है, कि बैठकर भोजन करने में ज्यादा समय  लगता है और यहाँ बैठ कर टाइम पास नहीं करना है , भोजन जल्दी करो और कक्षा में बैठो।  इस प्रकार मध्यान्न भोजन जैसे अभिन्न योजना के लिए शिक्षक एवं मध्यान्न भोजन संचालिकाओं द्वारा गुणवत्ता वर्ष की धज्जियाँ बिना किसी डर-भय के उड़ाई जा रही है।  जिस पर ना ही कोई अधिकारी ध्यान देने वाले हैं और ना  ही कोई जन-प्रतिनिधि। शासन द्वारा चाहे भ्रस्टाचार पर लगाम लगाने कोई भी योजना बनाती रहे पर ये लापरवाह एवं स्वार्थी लोग अपने आदतों से बाज़ नहीं आने वाले।

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