-15 फरवरी को होगा नामांकन, तीन मार्च को मतदान व छह मार्च को होगी गिनती

विशेष न्यूज सुनामी न्यूज टी वी
विवेक सिहं कानपुर
कानपुर। चुनाव आयोग द्वारा स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र से एमएलसी की तिथियों की घोषणा होने के बाद से कानपुर-फतेहपुर के मतदाताओं से प्रत्याशियों ने संपर्क करना शुरू कर दिया है। लेकिन क्षेत्र के 171 प्रधान मतदाता सूची से बाहर होने के चलते ग्राम पंचायत सदस्यों को कोस रहें हैं। यह सभी प्रधान ग्राम पंचायत के गठन न होने से इस चुनाव में शामिल नहीं हो पाएगें। स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र के विधान परिषद का कार्यकाल 15 जनवरी को समाप्त हो गया था।

लेकिन मतदाता सूची तैयार न होने के चलते चुनाव नहीं कराया जा सका। कानपुर जिला पंचायत राज अधिकारी हरीशंकर सिंह ने बताया कि जिला पंचायत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाताओं की सूची शासन को भेज दी गई है। जिले में 161 ग्राम पंचायतों का अभी भी गठन नहीं हो पाया है। जिसके चलते इनको सूची से बाहर रखा गया है। इसी तरह फतेहपुर जनपद में 10 प्रधान मतदान नहीं कर पाएगें। जिला पंचायत राज अधिकारी जीतेन्द्र कुमार मिश्रा ने बताया कि नौ ग्राम पंचायतों का गठन नहीं हो पाया है और एक प्रधान जेल में होने के चलते एमएलसी चुनाव में मतदान से वंचित रह जाएगा।

इसलिए मतदान से हुए बाहर
ग्राम प्रधान चुनने के बाद जब तक ग्राम पंचायत का गठन नहीं हो जाता तब तक ग्राम प्रधान का अस्तित्व नहीं होता। ग्राम पंचायत का गठन होने के लिए दो तिहाई ग्राम पंचायत सदस्यों का होना अनिवार्य होता है। लेकिन 2010 से अविश्वास प्रस्ताव का अधिकार खत्म होने के बाद लोग सदस्य बनने के लिए दिलचस्पी नहीं दिखा रहें हैं।

यह है मतदाता
जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया कि स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव के लिए जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, पार्षद, कैण्ट बोर्ड के सदस्य, स्थानीय विधायक व सांसद मतदान करते हैं।

1937 बीडीसी भी होगें वंचित
कानपुर-फतेहपुर स्थानीय प्राधिकारी विधान परिषद चुनाव में नए 1937 क्षेत्र पंचायत सदस्य मतदान करने से वंचित होगें। जिला पंचायत राज अधिकारी हरीशंकर सिंह ने बताया कि क्षेत्र पंचायत का गठन न होने के चलते इनको मतदाता सूची से बाहर रखा गया है और पुराने क्षेत्र पंचायत सदस्य ही मतदान करेगें। क्षेत्र में कानपुर नगर से 789 सदस्य व फतेहपुर से 1148 सदस्य हैं।

पिछली बार बसपा ने दर्ज की थी जीत
जिला पंचायत अध्यक्ष व क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष की तरह स्थानीय प्राधिकारी विधान परिषद सदस्य के लिए अमूमन यह माना जाता है कि इन सीटों पर सत्ताधारी पार्टी ही काबिज होती है। पिछली बार सत्ताधारी पार्टी के प्रत्याशी अशोक कटियार ने इस सीट पर जीत का परचम लहराया था।

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