बंध्याकरण-नसबंदी के लिए सर्जन नहीं

गिरिडीह : वर्ष भर चलनेवाले परिवार नियोजन कार्यक्रम में जागरूकता के अभाव के कारण स्वास्थ्य महकमा की मुश्किलें बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र में लोग बंध्याकरण व नसबंदी के लिए दिसंबर से फरवरी तक इंतजार करते हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में भीड़ लगी रहती है अप्रैल से सितंबर-अक्टूबर तक इसकी रफ्तार कम रहती है। एक बड़ी बाधा शल्य चिकित्सकों का टोटा भी है। बंध्याकरण और नसबंदी के लिए ठंड का इंतजार अब बेतुकी बात हो गयी है। स्वास्थ्य महकमा इस अभियान को वर्षभर जारी रखने के लिए जून-जुलाई के दौरान जनसंख्या नियंत्रण पखवारा मनाता है। बावजूद इसके ठंड के दौरान सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन के लिए कतार लग जाती है। अभियान का दूसरा पक्ष यह भी है कि जिले में शल्य चिकित्सकों का भारी टोटा है। ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करनेवाले चिकित्सकों का स्थानांतरण हो जाने से विभाग की परेशानी बढ़ जाती है। वर्तमान में जिले में चिकित्सकों के कुल स्वीकृत पद का आधा से अधिक रिक्त है। विभागीय आंकड़ा के अनुसार जिले में डॉक्टरों के 144 पद स्वीकृत हैं। पदस्थापित डॉक्टरों की संख्या 70 के करीब है। जिले के धनवार, डुमरी और बगोदर में ही …

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