राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी पत्रिका ‘ऑर्गनाइजर’ में शनि शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश से महिलाओं के बैन का समर्थन किया है. साथ ही ‘सम्मानजनक वार्ता’ के जरिए इस विवाद को सुलझाने की सलाह भी दी है.

संपादकीय में पूछा गया है कि ‘तर्कवादी’ ये बताएं कि क्या वह जबरन उस भगवान की पूजा करना चाहते हैं जिसमें उनका विश्वास नहीं या उन्हें उन लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए जो शनि देव में आस्था रखते हैं. इसमें बाल गंगाधर तिलक के जमाने में तर्कवादी वार्ता का भी जिक्र किया गया है.

शनि मंदिर में महिलाओं का चबूतरे पर जाना परंपरा के खिलाफ माना जाता है. लेकिन 400 महिलाओं ने एकजुट होकर यह परंपरा तोड़ने की ठान ली है. मंदिर में पूजा करने की जिद पर अड़ी महिलाओं ने 26 जनवरी को मंदिर में चबूतरे पर पूजा करने का ऐलान किया था. लेकिन सैकड़ों महिलाओं को मंदिर से करीब करीब 80 किलोमीटर दूर ही रोक लिया गया. प्रशासन ने करीब 350 महिलाओं को हिरासत में भी ले लिया था. हालांकि कुछ देर बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.

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