मुंबई। साल 2016 की पहली क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का ऐलान किया है। फिलहाल रेपो रेट 6.75 फीसदी पर ही बरकरार रहेगा। साथ ही रिवर्स रेपो रेट भी 5.75 फीसदी पर बरकरार रहेगा। इसके अलावा आरबीआई ने सीआरआर में भी कोई बदलाव नहीं किया है। लिहाजा सीआरआर भी 4 फीसदी पर ही बरकरार रहेगा। मार्जिनल स्टैंडिंग फैसलिटी 7.75 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। आरबीआई की अगली क्रेडिट पॉलिसी 5 अप्रैल 2016 को जारी होगी।

रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि वर्ष 2016-17 में महंगाई दर का वर्तमान स्तर पर ही रहने का अनुमान है। सातवां वेतन आयोग के इंपेक्ट और मानसून व सुखे की स्थिति का भी रिजर्व बैंक समीक्षा करेगा, उसके बाद ही आने वाले समय में रेट कट का निर्णय लेगा। रिजर्व बैंक ने कहा है कि एक से दो साल तक सातवें वेतनमान का असर रहेगा। रिजर्व बैंक यह देखना चाहता है कि सरकार इसे कब से लागू करती है। राजन ने कहा कि सरकार के कदम पर निर्भर करता है कि वह सातवां वेतन आयोग के लिए क्‍या कदम उठाती है। रिजर्व बैंक ने संकेत दिया है कि अगले एक साल तक रेट कट की संभावना नहीं है। मौजूदा वित्त वर्ष में विकास दर 7.4 फीसदी रहेगा। अगले वित्त वर्ष में 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है।

कई विशेषज्ञों का मानना था कि रघुराम राजन बजट से ठीक पहले ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं करेंगे और बजट घोषणाओं व सरकारों की नीतियों का इंतजार करेंगे। जबकि कुछ का कहना था कि रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की जा सकती है। गौरतलब है कि पिछले दिनों रघुराम राजन ने कहा था कि महंगाई दर में नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को देखते हुए सरकार को राजकोषीय घाटा पर नियंत्रण रखना चाहिए था। ब्याज दरों के घटने से महंगाई बढ़ सकती है। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार को राजकोषीय घाटे की चिंता करने की बजाय सरकारी खर्च बढ़ाना चाहिए ताकि लोगों के पास पैसा पहुंच सके। यह बात सिंगापुर के प्रमुख बैंक डीबीएस ने कही।

कब-कब हुई ब्याज दरों में कटौती

साल 2015 में रिजर्व बैंक ने मौद्रिक समीक्षा में चार बार ब्‍याज दरों में कटौती की थी। 2015 की शुरुआत में रेपो रेट 8 फीसदी था। रिजर्व बैंक ने 15 जनवरी 2015 को साल की पहली कटौती करते हुए 0.25 फीसदी बेसिस अंक की कटौती की घोषणा की थी। इसके साथ ही रेपो रेट 7.75 फीसदी हो गया। हालांकि पहली कटौती के बाद अधिकतर बैंकों ने इसका फायदा अपने ग्राहकों को नहीं दिया। बाद में रिजर्व बैंक ने 4 मार्च 2015 को रेपो रेट में दूसरी कटौती की। इस बार भी केंद्रीय बैंक ने 25 बेसिस अंक की कटौती की। इस कटौती के बाद रेपो रेट 7.50 हो गया था। रेपो रेट में तीसरी कटौती रिजर्व बैंक की 2 जून को हुई मौद्रिक समीक्षा में की गयी। इस समय भी रेपो रेट में 25 बेसिस अंक की कटौती की गयी थी। इस कटौती के बाद रेपो रेट 7.25 फीसदी रह गया था। साल की अंतिम कटौती 29 सितंबर 2015 को की गई। रघुराम राजन ने एक अप्रत्‍याशित फैसला लेते हुए इस बार 50 बेसिस अंक की कटौती कर दी। इस कटौती के बाद रेपो रेट 6.75 फीसदी रह गया है और इस बार भी इसे बिना परिवर्तित रखा गया है।

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