सीतामढ़ी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने वकील चंदन सिंह की भगवान राम के मां जानकी (सीता) को छोड़मे के मामले में दंडित किए जाने के लिए दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि आखिर त्रेतायुग के मामले में गवाही कौन देगा और सजा किसे दी जाएगी?

‘राम ने यह नहीं सोचा अकेली सीता कैसे रहेगी’
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्याम बिहारी ने याचिकाकर्ता और वकील चंदन सिंह से यह भी पूछा कि आखिर त्रेता युग में घटित इस घटना को लेकर अदालत क्यों आए. वकील ने तर्क दिया कि माता सीता का कोई कसूर नहीं था, इसके बाद भी भगवान राम ने उन्हें जंगल में क्यों भेजा? वकील ने कहा कि कोई पुरुष अपनी पत्नी को कैसे इतनी बड़ी सजा दे सकता है. भगवान राम ने यह सोचा भी नहीं कि घनघोर जंगल में माता सीता अकेली कैसे रहेगी.

याचिका में रामायण की घटनाओं का जिक्र
अदालत ने वकील से पूछा कि इस याचिका में यह नहीं बताया गया है कि भगवान राम ने मां सीता को किस दिन घर से निकाला था. वकील चंदन ने अदालत में कहा, ‘मैंने माता सीता को न्याय दिलाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है और मैं अदालत से सीता जी के लिए न्याय की भीख मांगता हूं. मैंने अपनी याचिका में रामायण की घटनाओं का विवरण लिया है.

उल्लेखनीय है कि सीतामढ़ी के डुमरीकला गांव निवासी और वकील ठाकुर चंदन सिंह ने न्यायालय में शनिवार को एक याचिका दर्ज कराते हुए अयोध्या के राजा राम पर अपनी पत्नी सीता के साथ उत्पीड़न का आरोप लगाया है. चंदन ने याचिका में कहा है कि भगवान राम ने एक शख्स के कहने पर अपनी पत्नी सीता को घर से बाहर निकाल दिया और जंगल में रहने के लिए मजबूर कर दिया. यह माता सीता के साथ अत्याचार है.

‘मिथिला की बेटी से हुई नाइंसाफी’
चंदन ने कहा कि माता सीता की जन्मभूमि मिथिला में है और भगवान राम ने मिथिला की रानी सीता के साथ अत्याचार किया है. मिथिला की बेटी के साथ नाइंसाफी हुई है इसलिए अदालत मां सीता को अब न्याय दे. उन्होंने याचिका में यह भी कहा है कि उनका मकसद किसी कि भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है. उन्होंने कहा है कि महिला उत्पीड़न त्रेतायुग में ही आरंभ हो गया था और उस समय भी महिलाओं को न्याय नहीं मिलता था.

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