न्यूयॉर्क: अमेरिकी बाजारों में सोमवार को घंटों की भारी खरीद-फरोख्त के बाद अल्फाबेट दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। अल्फाबेट ने टेक्नोलॉजी की दुनिया की दिग्गज कंपनी ऐपल को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया है। बता दें कि अल्फाबेट ने अस्तित्व में आने के महज 5 महीने बाद ही यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। तब दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन और टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल खुद को पुनगर्ठित करके होल्डिंग कंपनी अल्फाबेट के अधीन आ गई थी।

अल्फाबेट द्वारा ऐपल को पछाड़ने की यह घटना एक बार फिर इतिहास को दोहराने और टेक्नोलॉजी बैटन के हस्तांतरण जैसा है। ऐपल ने 2010 में दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प को पछाड़कर नंबर एक की कुर्सी हासिल की थी। इसी तरह करीब दो दशक पहले माइक्रोसॉफ्ट भी इंटरनेशनल बिजनेस मशीन (IBM) को पछाड़कर सबसे मूल्यवान कंपनी बनी थी।

दोनों टेक्नोलॉजी कंपनियों के बीच पिछले कई सालों से जबरदस्त टक्कर देखने को मिली है। दोनों ही कंपनियां मोबाइल और टेबलेट बाजार में भिड़ने के अलावा अपने-अपने मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम को लेकर भी एक-दूसरे से मुकाबला करती रही हैं। साल 2008 में गूगल ने जब अपना मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड लॉन्च किया तो जल्द ही यह नंबर एक ऑपरेटिंग सिस्टम बन गया था।

ऐपल अब भी दुनिया की सबसे ज्यादा एंड्रॉयड फोन बनाने वाली कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ मुकदमे में फंसी हुई है। सोमवार को अल्फाबेट के शेयरों ने बेहतर तिमाही नतीजों की खबर के बाद 6 फीसदी की छलांग लगाई। इससे कंपनी के शेयरों का मूल्य बढ़कर 55400 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि ऐपल के कुल शेयरों का मूल्य 53400 करोड़ डॉलर है।

इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ऐपल लंबे समय से कोई नया ट्रेंड-सेटिंग प्रोडक्ट पेश करने में विफल रही है, जबकि कंपनी के सबसे अहम प्रोडक्ट आईफोन को बाजार में आए करीब 9 साल हो गए हैं, जिसकी बिक्री बढ़ने की रफ्तार कम हो गई है।

महज 13 महीने पहले दोनों कंपनियों के बीच फासला इतना ज्यादा था कि कोई इस नतीजे की उम्मीद भी नहीं कर सकता था। तब ऐपल की मार्केट वैल्यू 64300 करोड़ डॉलर थी, जबकि अल्फाबेट की केवल 36100 करोड़ डॉलर।

अगर मंगलवार सुबह भी दोनों कंपनियों के शेयर इसी स्तर पर खुले तो अल्फाबेट आधिकारिक तौर पर ऐपल को पछाड़कर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बन जाएगी।google-alphabet_625x300_71454382608

 

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