(कृष्ण कुमार तिवारी/ मनोरंजन उपध्याय )

सिवान / दरौली : जिले के दरौली थाने के ग्राम कनैला कि ये घटना मानवता को शर्मशार कर रिश्ते को कलंकित करने वाली है , यहाँ दहेज और पैसे के घमंड में चूर पति ने अपने माँ और बाप के साथ मिलकर अपनी पत्नी को जलाकर हत्या कर दी , सिवान जिले के ग्राम फतेपुर के शैलेन्द्र कुमार अपनी बेटी अर्चना कि शादी दरौली थाने ग्राम कनैला के फौजदार चौहान के पुत्र अनिल चौहान से वर्ष २०११ में हुई थी , शादी के बाद से अर्चना को ससुराल वाले किसी न किसी बात को लेकर अर्चना चौहान को बराबर प्रताडित किया करते थे , इस प्रताडना कि जानकारी अर्चना अपने मोबाइल फोन से बराबर अपने मायके वालो को दिया करती थी , इस बात को लेकर लड़की पक्ष वालो ने लड़केवालों यहाँ जाकर कई बार समझया और न्याय कि भीख मागी लेकिन  लेकिन पैसे के घमंड में अनिल चौहान मतवाला रहता था , इसी दौरान अर्चना को एक ढाई साल का लड़का भी हुआ और एक दिन लड़केवालो ने पुरे साजिश के तहत मिट्टी के तेल डालकर अर्चना को जला डाला जब इसकी जानकारी लड़की के परिवार वालो को मिली तो वे दौड़े – दौड़े उसके घर पहुचे तक मालूम चला कि उनकी लड़की को सिवान सदर अस्पताल लेकर ल्द्केवाले लेकर गए है, वहा जाने पर मालूम हुआ कि उसको गंभीर हालत में गोरखपुर रेफर किया गया है , गोरखपुर जाने पर पता चला कि वहा से भी उनकी बेटी को दिल्ली रेफर कर दिया गया है , वहा सफदर गंज हास्पिटल में मेरी लड़की अपनी आखिरी सास ली , इसके बाद लड़की के पिता ने दरौली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जिसका कांड सख्या 156/15 दर्ज किया गया , जिसमे धारा 304(B) 34 लगाई गयी , इसके लड़की के पिता ने दहेज के कारण अपनी बेटी कि साजिश के तहत हत्या करने का आरोप अर्चना के पति अनिल चौहान , ससुर फौजदार चौहान और सास उमा देवी को नामजद अभियुक्त बनया , घटना के लगभग एक साल बित जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को न्याय नही मिल पाया इसके लिए लड़की के पिता थाने से लेकर बिहार के मुख्यमंत्री और सभी पुलिस अधिकारियो के यहाँ न्याय कि गुहार लगा चुके है , लेकिन कही से उनको न्याय नही मिल पाया है , इसे पुलिस कि विफलता कहे या राजनितिक दबाब , एक तरफ जहा भारत के प्रधान मंत्री से लेकर बिहार के मुख्य मंत्री महिला सशक्तिकरण कि बाते कर रहे है, दहेज प्रथा पर रोक लगाने के लिए सरकार कई तरह के कार्यक्रम चला रही है , लेकिन आये दिन महिलाओ पर अत्याचार बढते जा रहे  है , जिसकी लाठी उसकी भैस वाली कहावत चरिततार्थ हो रही है , आखिर कबतक मिलेगा आधी आबादी को उनका वाजिब हक यह सवाल आज भी समाज के सामने है , इसके लिए आज हमारे समाज के लोगो को अपनी मानसिकता बदलकर जनजागरूकता लाने कि जरूरत है नही तो आये दिन हमारे समाज में अर्चना चौहान जैसी कितनी बहु बेटियों को दहेज कि आग में जलना पड़ेगा20160202_130636

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