लखनऊ। /कानपुर बरेली में दस वर्षीया आशा की दरिंदगी के बाद हत्या के आरोपियों मुरारी तथा उमाकांत के चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं है। दोनों को मेडिकल के लिए बरेली के जिला अस्पताल लाया गया था।

जिला अस्पताल में मुरारी तथा उमाकांत के चेहरे पर न तो कोई पछतावा था और न कोई शिकन थी, जो भी उसके कृत्य के बारे में सुनने वाले लोग उसे धिक्कार रहे थे। इसी बीच अस्पताल के कर्मचारियों ने से पूछा, तुझे अपने अपराध की सजा का पता है तो बेशर्मी से बोले, फांसी होगी और क्या।

एक अन्य से कबूल किया दुष्कर्म

सभी उमाकांत को नफरत की निगाह से देख रहे थे। इसी बीच किसी ने सवाल किया कि इससे पहले भी किसी से दुष्कर्म किया है तो जवाब मिला गांव की ही एक लड़की से किया था लेकिन अब उसकी शादी हो चुकी है। दो बार जानवरों से अप्राकृतिक सेक्स करने की बात भी उसने दोहराई। जिला अस्पताल में उसका मेडिकल हुआ। उसे सजा दिलाने के लिए पर्याप्त सबूत जुटाने की दिशा में शरीर के विभिन्न हिस्सों के बाल, एक्सरे आदि एकत्र किया गया।

अस्पताल में रही कड़ी सुरक्षा

मुरारी तथा उमाकांत के मेडिकल के दौरान जिला अस्पताल में कड़ी सुरक्षा रही। पुलिस को आशंका थी कि लोग गुस्से में हमला कर सकते हैं। ऐसे में कमरा बंद करके कड़ी सुरक्षा में उसका मेडिकल किया गया।

लहूलुहान होने पर भी नहीं बख्शा

उमाकांत ने कबूल किया कि पहले दरिंदगी उसने ही की। इसके बाद धर्मपाल ने हैवानियत दिखाई। घटना के दौरान पीडि़ता लहूलुहान हो गई लेकिन वे नहीं माने और हैवानियत जारी रखी।

बेहोशी की अवस्था में मिली मौत

हैवानियत के दौरान आशा बेहोश हो गई। इसके बाद उन्हें लगा कि उनकी पोल खुल सकती है इसलिए गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। उमाकांत के दो बच्चे हैं। बेटी छह वर्ष की है। एक बेटा है जोकि डेढ़ साल का है। उसकी शादी गुलडिय़ा की सरोज से हुई थी। आठ वर्ष पहले हुई शादी के बाद के मायका पक्ष भी नवाबगंज के गुर गांव में आकर रहने लगे थे। उमाकांत खुद कक्षा आठ तक पढ़ा है।

मौसी के छुपा था दरिंदा उमाकांत

बरेली के नवाबगंज के आनंदापुर गांव में दस वर्ष की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के आरोपी उमाकांत भी गिरफ्तार कर लिया गया। वारदात को अंजाम देने के बाद वह अपनी मौसी के घर छिप गया था। कल नवाबगंज के बरखन तिराहे के पास वह मौजूद था, उसी वक्त पुलिस ने पकड़ लिया। मुरारी को पुलिस ने जेल भेज दिया। उमाकांत की मानें तो मुरारी के साथ बुखारपुरा में शराब पीने के बाद जब गांव पहुंचा तो पहली बार लकड़ी का गठ्ठर लिए आशा को देखकर उसे जाने दिया था। दोबारा मुरारी के उकसाने पर उन्होंने बच्ची को खेत में खींच लिया। उमाकांत के अनुसार, दुष्कर्म के बाद पहचान उजागर होने का डर लगा तो आशा की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि वारदात को अंजाम देने के बाद उमाकांत मौसी के घर ज्योरा मकरंदपुर भाग गया था।

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