आदर्श सोसाइटी घोटाला केस में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को बड़ा झटका लगा है. राज्यपाल सीएच विद्यासागर राव ने गुरुवार को मामले में सीबीआई को पूर्व सीएम पर केस चलाने की इजाजत दे दी है.

बताया जाता है कि इस इजाजत के साथ ही अशोक चव्हाण पर सीआरपीसी की धारा 197 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा. इसके अलावा आईपीसी की धारा 120बी और 420 के तहत भी अपराध तय किए जाएंगे.

बता दें कि 8 अक्टूबर 2015 को लिखे अपने पत्र में मुंबई में सीबीआई के संयुक्त निदेशक ने चव्हाण पर सीआरपीसी की धारा 197 के तहत केस चलाने की मांग की थी. जांच एजेंसी ने इसके लिए जस्टि‍स पाटिल समिति की जांच रिपोर्ट को आधार बनया था. प्रोटोकॉल के तहत राज्यपाल का यह निर्णय मंत्रियों के राज्य परिषद की सलाह के बाद लिया जाता है.

अशोक चव्हाण उन 13 लोगों में शामिल हैं, जिन्हें सीबीआई ने आदर्श घोटाले में चार्जशीट किया था. पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री मौजूदा समय में पार्टी के सांसद हैं और महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष भी. इससे पहले कांग्रेस की सरकार के समय तत्कालीन गवर्नर के. शंकरनारायणन ने इस मामले में सीबीआई को अनुमति देने से इनकार कर दिया था.

ऐसे गरमाया था आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले का मामला-

जुलाई 1999: आदर्श सोसाइटी ने कोलाबा क्षेत्र में भूमि के लिए सरकार से सम्पर्क किया.
9 जुलाई 1999: सरकारी प्रस्ताव के तहत सोसाइटी को प्लाट आवंटित किया गया.
4 अक्तूबर 2004: मुंबई के जिलाधिकारी ने भूमि का कब्जा सोसाइटी को सौंपा.
27 अक्तूबर 2009: पश्चिमी नौसेना कमान कोआपरेटिव के उप पंजीयक से सोसाइटी की विस्तृत जानकारी मांगी.
16 सितंबर 2010: आदर्श सोसाइटी एमएमआरडीए से कब्जा प्रमाणपत्र मिला.
25 अक्तूबर 2010: नौसेना ने इस बात की पुष्टि की कि उसने सुरक्षा कारणों से आदर्श सोसाइटी पर विरोध जताया है.
28 अक्तूबर 2010: मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री की सास और अन्य रिश्तेदारों के सोसाइटी में फ्लैट हैं.
31 अक्तूबर 2010. बृहन्मुम्बई बिजली आपूर्ति एवं परिवहन ने कब्जा प्रमाणपत्र मांगते हुए नोटिस जारी किया.
3 नवंबर 2010: एमएमआरडीए ने आदर्श सोसाइटी का कब्जा प्रमाणपत्र रद्द किया. बेस्ट ने सोसाइटी की विद्युत आपूर्ति जबकि बीएमसी ने पानी की आपूर्ति बंद की.

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