सियाचिन में हिमस्खलन की चपेट में आने से बुधवार को लापता हुए सेना के 10 जवानों का 24 घंटे बाद भी कोई पता नहीं चल पाया है. इनमें एक जूनियर कमीशंड अध‍िकारी और मद्रास बटालियन के 9 जवान शामिल हैं. सभी के बर्फ में दब जाने की आशंका है, वहीं बचाव के लिए सेना और वायुसेना की टीम संयुक्त अभि‍यान चला रही है.

जानकारी के मुताबिक, 19 हजार फुट की ऊंचाई पर सेना के कैंप के पास बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे के करीब हिमस्खलन हुआ था. इसमें कैंप के दक्षि‍ण में गश्त कर रहे 10 जवान फंस गए हैं. रक्षा मंत्रालय के उत्तरी कमांड के प्रवक्ता एसडी गोस्वामी ने कहा, ‘सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और हम इसे लेह और उधमपुर से मॉनिटर कर रहे हैं.’ उन्होंने पुष्टि‍ की कि लापता हुए सेना के 10 जवानों में जूनियर कमीशंड ऑफिसर रैंक का एक अफसर और 9 जवान शामिल हैं.

बता दें कि अभी पिछले महीने ही 3 जनवरी को हिमालयन रेंज के लद्दाख में आए हिमस्खलन में सेना के 4 शहीद हो गए थे.

सबसे ऊंचा बैटल फील्ड
हिमालयन रेंज में मौजूद सियाचिन ग्लेशियर दुनिया का सबसे ऊंचा बैटल फील्ड है. सियाचिन से चीन और पाकिस्तान दोनों पर नजर रखी जाती है. सर्दी के मौसम में यहां अक्सर हिमस्लखन होता है. ठंड में यहां का न्यूनतम तापमान -50 डिग्री (-140 डिग्री फॉरेनहाइट) तक हो जाता है. भारतीय सेना के आंकड़ों के मुताबिक, साल 1984 के बाद से अब तक यहां तैनात 8000 जवान शहीद हो चुके हैं. जवानों के शहीद होने की मुख्य वजह हिमस्खलन, भूस्खलन, ठंड के कारण टिशू ब्रेक और हार्ट अटैक आदि हैं.

अधि‍कतम तीन महीनों की तैनाती
नियमों के मुताबिक, किसी भी सैनिक की उत्तरी सि‍याचिन ग्लेशि‍यर में अधि‍कतम तीन महीने तक तैनाती हो सकती है. जबकि बाना पोस्ट जैसे कुछ अधि‍क खतरनाक इलाकों में यह सीमा 30 दिन की है. उत्तरी ग्लेशि‍यर में तैनात यूनिट को हर छह महीने पर रोटेट किया जाता है.

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