जिस मुकदमे में भगत सिंह को फांसी दी, उस FIR में नाम तक नहीं

सुनामी न्यूज की विशेष रिपोट
विवेेक सिहं ब्यूरोचीफ
04/02/2016

नई दिल्ली/लाहौर. फांसी के 85 साल बाद शहीद भगत सिंह के मामले सुनवाई लाहौर कोर्ट में सुनवाई शुरू हो  चुकी है। ब्रिटिश पुलिस ऑफिसर सॉन्डर्स के मर्डर केस में दर्ज FIR में भगत का नाम नहीं हैं। इस मुकदमें में 450 गवाह थे मगर किसी भी गवाह की बात अदालत में नहीं सुनी गई। शहीद भगत सिंह के वकीलों को भी अदालत बोलना का मौक़ा तक नहीं दिया। फिलहाल शहीद भगत सिंह को बेगुनाह साबित करने की कोशिश शुरू हुई है। पाकिस्तान के लाहौर हाईकोर्ट में बुधवार को ब्रिटिश पुलिस ऑफिसर सॉन्डर्स के मर्डर केस की सुनवाई हुई। भगत सिंह को अंग्रेज सरकार ने 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी थी। अदालत के सामने ये बात आई है कि एफआईआर की ओरिजिनल कॉपी में भगत सिंह का नाम नहीं है। 2014 में लाहौर पुलिस ने 1928 में सॉन्डर्स की हुई हत्या की एफआईआर की ओरिजिनल कॉपी मुहैया कराई थी। इस कॉपी में भगत सिंह का नाम नहीं है, जबकि इसी मामले में उन्हें फांसी दी गई थी। लाहौर पुलिस ने अनारकली पुलिस स्टेशन से कोर्ट के आदेश के बाद सॉन्डर्स की हत्या में दर्ज हुई एफआईआर की कॉपी खोजी थी। यह उर्दू में लिखी गई थी। मला 17 दिसंबर 1928 को शाम 4.30 बजे अनारकली पुलिस स्टेशन पर दर्ज हुआ था। यह केस आईपीसी के सेक्शन 302, 201 और 190 के तहज दर्ज  किया गया था। भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के चेयरमैन वकील इम्तियाज राशिद कुरैशी ने नवंबर में कोर्ट में इस केस पर सुनवाई के लिए पिटीशन दाखिल की थी। कुरैशी ने कहा है कि भगत सिंह फ्रीडम फाइटर थे और उन्होंने आजादी दिलाने की लड़ाई लड़ी थी। पिटीशन में उन्हें बेगुनाह एलान करने की मांग की गई है। कुरैशी का कहना है ‘मैं सॉन्डर्स की हत्या में भगत सिंह को बेगुनाह साबित करके रहूंगा।’ इस मामले में लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इजाजुल अहसान ने जस्टिस खालिद महमूद खान की अगुआई में दो डिविजन बेंच बनाई है। आखिरी सुनवाई जस्टिस शुजात अली खान ने मई 2013 में की थी। तब उन्होंने केस को चीफ जस्टिस के पास बड़ी बेंच बनाने के लिए भेजा था। पिटीशन भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु द्वारा कथित रूप से ब्रिटिश पुलिस ऑफिसर की हत्या करने के मामले में है। पिटीशन में कहा गया है कि पहले भगत सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी लेकिन बाद में केस को बढ़ाचढ़ाकर उन्हें फांसी दे दी गई।49b8296b-69c6-48ff-a9af-0d8f0b984aec

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