पिछले 10 दिनों से दिल्ली में चल रही एमसीडी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर हाई कोर्ट ने एमसीडी को कड़ी फटकार लगाई है.

दोबारा सुनवाई करते हुए तीनों निगमों ने कोर्ट में कहा कि जनवरी तक की सैलेरी वो कर्मचारियों को दे चुके हैं. साथ ही निगमों के वकीलों ने कहा कि हम कर्मचारियों को काम पर वापस आने के लिए नोटिस भी जारी काट चुके हैं.

फिर कोर्ट ने कहा की इस मामले पर आप अब तक क्यों सोते रहे? आपको पता है कि ये कितना गंभीर मामला है. आप इस पर पूरी तरह से सक्रिय क्यों नहीं है? आपने अब तक कर्मचारियों से क्यों नहीं बात कि की जनवरी तक की सैलेरी मिलने के बाद भी वो अब तक क्यों हड़ताल पर हैं? उनकी दिक्कतें क्या हैं. हमे पूरा जवाब चाहिए . आप कर्मचारियों से बात करके आइए कि वो हड़ताल कब खत्म कर रहे हैं और हमें 2 बजे तक बताइये. हम दोपहर 2.15 पर दोबारा सुनवाई करेंगे.

इससे पहले कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार और एमसीडी की लड़ाई के चलते लोग बेहद परेशान हो रहे हैं. ये एमसीडी की जिम्मेदारी है. शहर में ऐसे हालात की इजाजत कोर्ट नहीं दे सकता.

याचिका लगायी गई है कि एक सप्तारह से ज्या दा होने पर भी न तो हड़ताल को खत्म किया गया न ही एस्मा लगाया गया. कुछ देर मे मामले की दोबारा सुनवाई होगी.

आज यहां प्रदर्शन
एमसीडी कर्मचारी शुक्रवार को दिल्ली के गाजीपुर इलाके में प्रदर्शन करने वाले हैं. एमसीडी के डॉक्टर, इंजीनियर और दूसरे स्टाफ सिविक सेंटर से राजघाट तक विरोध मार्च भी निकाल रहे हैं. इसके अलावा बीते 2 दिन में जमा हुए भीख के पैसों के दो ड्राफ्ट बनाएंगे. एक CM केजरीवाल को देंगे और दूसरा PM नरेंद्र मोदी को

मेयरों से बातचीत बेनतीजा
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को ही एमसीडी के तीनों मेयरों के बात की थी. इसके बाद उपराज्यपाल (LG) नजीब जंग से भी मुलाकात की. लेकिन यह सारी कवायद बेनतीजा रही. मेयरों ने दिल्ली सरकार से तत्काल 307 करोड़ रुपये की मांग की है. इस पर सिसोदिया ने केजरीवाल से चर्चा करने की बात कही है. इससे पहले केजरीवाल ने कहा था कि सरकार एमसीडी कर्मयिों को 31 जनवरी तक की सैलरी देगी.

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