पंजाब के पठानकोट एयर बेस पर हुए आतंकी हमले को अंजाम देने आए आतंकियों की संख्या पर जांचकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाएं हैं. हमले में शामिल आतंकियों की संख्या 4 थी या 6, इस पर एनआईए निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह पा रही है.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के अनुसार बेस पर आंतकियों को मुंहतोड़ जवाब देने वाले नेशनल सिक्योरिटी गार्ड का कहना है कि उन्होंने छह आतंकियों को मारा है. उनका कहना है कि ‘चार आतंकियों को मार गिराने के बाद दूसरे ‘एनकाउंटर’ में दो आतंकी दो मंजिला इमारत को उड़ाए जाने में मारे गए. जिसके चलते वहां केवल राख ही बरामद हुई और कुछ मांस जो आंतकियों के शरीर का हो सकता है.’

लेकिन सवाल ये उठता है कि आतंकियों के कपड़ों का कोई भी टुकड़ा राख में बरामद क्यों नहीं हुआ. आपरेशन के बाद वहां गद्दों के कई टुकड़े मिले लेकिन चार अन्य आंतिकयों द्वारा पहने गए वर्दी के टुकड़े बरामद नहीं हुए. जांचकर्ता अब फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं.

NIA चीफ करेंगे पठानकोट एयरबेस का दौरा
इस मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस बात का संज्ञान लेते हुए फिर से मूल्यांकन करने के लिए योजना बना रही है कि इस हमले में केवल चार आतंकियों के शामिल होने की संभावना है. एनआईए चीफ शरद कुमार इस मामले में जुटाए गए ताजा सबूतों का जायजा लेने के लिए अगले हफ्ते पठानकोट एयरबेस का दौरा कर सकते हैं.

आतंकियों की संख्या को लेकर भी सवाल
पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले में शामिल आतंकियों की संख्या को लेकर भी सवाल हैं. सरकार ने इस हमले में 6 आतंकियों के मारे जाने की बात कही है. इस बीच हमले का सूत्रधार पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद है. जैश ने जश्न के लिए जो ऑडियो जारी किया उसमें 4 आतंकियों का जिक्र किया गया है. हालांकि जांच एजेंसियां ये भी मानकर चल रही है कि जैश जांच को भटकाने की कोशिश करने के लिए ऐसे दावे कर रहा है.

पठानकोट में नए साल का पहला आतंकी हमला
गौरतलब हो कि आतंकवादी दो जनवरी तड़के 3 बजे लैंड क्रूजर और पजेरो गाड़ी से पठानकोट एयरबेस पहुंचे थे. आतंकी एके-47, हैण्ड ग्रेनेड, जीपीएस सिस्टम समेत भारी गोला बारूद से लैस थे, लेकिन मुस्तैद सुरक्षा बलों ने उनके हमले को नाकाम कर दिया. आतंकी 30 दिसंबर को गुरदासपुर से लगी सीमा से भारत में घुसे थे. सभी जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी बताए जाते हैं. बताया जाता है कि आतंकियों को बहावलपुर में ट्रेनिंग मिली और इनके हैंडलर का नाम मोहम्मद अशफाक और हाजी अब्दुल था.

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