मेरठ से बेंगलोर तक तेंदुओं की दहशत, कई बार किए हमले

बेंगलुरु के एक स्कूल में तेंदुआ घुस गया। खबर पढ़ने वालों को कोई खास हैरानी नहीं हुई क्योंकि अक्सर ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं जिनमें तेंदुए या बाघ के इंसानी इलाकों में घुसने की बातें होती हैं। पिछले कुछ महीने में ही कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं और अब तो इंसान-तेंदुए, बाघ के आमने सामने आने की खबर सिरहन भी पैदा नहीं करती।

सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? इस टकराव को कैसा रोका जा सकता है? और आखिर कैसे इन जंगली जानवरों को मानव बस्तियों से दूर रखा जाए? सिमटता वन क्षेत्र और भोजन की खोज इन जानवरों को जंगल से बाहर निकाल कर मानव बस्ती में ले आती है। लेकिन यहां हमेशा भोजन नहीं मिलता कई बार मौत से भी सामना हो जाता है।

अभी वक्त पुरानी बात है जब यूपी के मेरठ से ऐसी खबर आई कि तेंदुआ शहर में घुस गया है। दो दिनों तक शहर में दहशत रही। कॉलेज बंद रखे गए। लोग घरों से नहीं निकले। शहर में चैन तब लौटा जब वो तेंदुआ वापस जंगल में लौट गया।

उत्तराखंड के पौड़ी इलाके में तो तेंदुए ने सात साल के बच्चे की जान ले ली। मध्य प्रदेश में भी तेंदुए ने एक शख्स पर हमला कर दिया। हालांकि वन विभाग उस पर काबू पाने में सफल रहा।

मध्य प्रदेश के छतरपुर में एक तेंदुआ जाल में फंसा पाया गया। ये जाल किसने बिछाया ये पता नहीं चल पाया। वन विभाग ने उसे बेहोश किया लेकिन अधिक डोज़ के कारण उसकी जान चली गई।

नवंबर 2015 में उत्तराखंड के पौड़ी जिले में तेंदुए ने हमला कर दो लोगों की जान ले ली। अक्तूबर 2015 में महाराष्ट्र एक तेंदुआ कुएं में गिर गया। उसे सही वक्त पर निकाल कर अस्पताल पहुंचाया गया।

महाराष्ट्र के ठाणे इलाके में एक तेंदुए ने एक बच्चे की जान ले ली तो वहीं राजस्थान के राजसमंद में एक तेंदुआ पानी पीने आया तो उसकी गर्दन बर्तन में फंस गई। उसे बेहोश कर उसकी गर्दन को बर्तन में से निकाला गया।

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