2012-15 के दौरान सरकारी बैंकों के 1.14 लाख करोड़ रुपए डूबे

अपने बहीखातों को दुरस्त करने के प्रयास स्वरूप सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंकों ने वित्त वर्ष 2012-15 के दौरान 1.14 लाख करोड़ रुपए के फंसे कर्ज को बटटे खाते में डाला। बैंकों ने 2014-15 में जो राशि बटटे खाते में डाली, वह इससे पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 53 फीसदी अधिक थी।

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान बैंकों ने 52,542 करोड़ रुपए बटटे खाते में डाले जो इससे पूर्व वित्त वर्ष की तुलना में 52.6 फीसदी अधिक है। मार्च 2015 में गैर निष्पादित परिसंपत्ति या फंसा कर्ज बढ़कर 2,67,065 करोड़ रुपए हो गया। 2014-15 में बैंकों ने कुल एनपीए का पाचवां हिस्सा बटटे खाते में डाला।

सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंकों ने 2013-14 में 34,409 करोड़ रुपए बटटे खाते में डाले जबकि 2012-13 में यह राशि 27,231 करोड़ रुपए थी। कुल मिलाकर पिछले तीन वित्त वषोंर् के दौरान 1.14 लाख करोड़ रुपए बटटे खाते में डाले गये। वित्त वर्ष 2014-15 में इस मामले में एसबीआई पहले स्थान पर रहा। उसने 21,313 करोड़ रुपए बटटे खाते में डाले। उसके बाद पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक का स्थान जिन्होंने क्रमश: 6,587 करोड़ रुपए तथा 3,131 करोड़ रुपए बटटे खाते में डाले।

इसके अलावा, इलाहबाद बैंक ने 2,109 करोड़ रुपए, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया ने 1,995 करोड़ रुपए, आईडीबीआई बैंक ने 1,609 करोड़ रुपए, बैंक आफ बड़ौदा ने 1,564 करोड़ रुपए, सिंडिकेट बैंक ने 1,527 करोड़ रुपए, केनरा बैंक ने 1,472 करोड़ रुपए तथा यूको बैंक ने 1,401 करोड़ रुपए बटटे खाते में डाले। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का फंसा कर्ज लगातार बढ़ा है। सितंबर 2015 में यह बढ़कर 3,00,743 करोड़ रुपए तक पहुंच गया जो मार्च 2015 में 2.67 लाख करोड़ रुपए था।

LEAVE A REPLY