निजी स्कूलों के प्रबंधन कोटे को बहाल करने के आदेश के खिलाफ दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट का रुख किया है। सरकार ने निर्णय को चुनौती देते हुए शनिवार को कहा कि यह फैसला भ्रष्टाचार रोकने के लिए किया गया था। कोटा बहाल होने से स्कूल प्रबंधकों की मनमानी बढ़ जाएगी। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई हो सकती है।

अदालत में नए सिरे तर्क पेश किए गए
इस अधिसूचना को जारी करने के लिए उपराज्यपाल से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है। यह पूर्ण बहुमत वाली सरकार है। राज्यहित में सरकार स्वतंत्र रूप से इस तरह के निर्णय लेने का अधिकार रखती है।

स्कूलों में दाखिले को लेकर दिन-प्रतिदिन भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी हो रही है। इस पर लगाम लगाने के लिए प्रबंधन कोटा बंद किया गया था। इस कोटे से सीटों की खरीद-फरोख्त का कारोबार चलाया जाता है। यही वजह है कि पिछले कुछ समय में नर्सरी दाखिले में बड़े घोटाले हुए हैं।

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि नेताओं और आला अधिकारियों को रिश्वत के तौर पर स्कूलों में सीटें दी जाती हैं। ऊपरी स्तर पर रिश्वतखोरी को रोकने के लिए भी यह अधिसूचना जारी की गई थी।

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