रक्षा मंत्रालय हालांकि अब वन रेंक वन पेंशन (ओआरओपी) के क्रियान्वयन को अंतिम रूप देने में लगा हुआ है लेकिन इसके विभिन्न पहलुओं को लेकर पूर्व सैनिकों का विरोध जारी है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि जिस प्रकार से यह योजना लागू की गई है, उससे जेसीओ स्तर तक के पूर्व सैनिकों को कम फायदा हो रहा है। जबकि वेतनवृद्धि का ज्यादा लाभ पूर्व अफसरों को हो रहा है।

वाइस ऑफ एक्स सर्विसमैन सोसायटी की इस मुद्दे पर मंगलवार को हुई बैठक में ओआरओपी के मौजूदा प्रावधानों के विरोध में छह मार्च को प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया है। संगठन का कहना है कि ओआरओपी का फायदा तभी होगा जब पेंशन की राशि को अंतिम वेतन का 50 फीसदी रखने वाला प्रावधान हटाया जाए। यह प्रावधान छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद लागू किया गया था।

पहले सैन्यकर्मियों को वेतन के 70 फीसदी तक पेंशन मिलती थी। लेकिन इसकी सीमा 50 फीसदी करने से पेंशन की राशि कम हो गई है। इसी प्रावधान के चलते अब ओआरओपी का फायदा नहीं मिल रहा है। संगठन ने कहा कि सेना में मिलिटरी सर्विस पे (एमएसपी) को लेकर भी समानता की जरूरत है।

अफसरों की एमएसपी तीन गुना है, जबकि यह बराबर होनी चाहिए क्योंकि सभी स्तर के अधिकारी एक समान खतरे का सामना करते हैं। सही मायने में अफसरों के बजाय सैनिकों को ज्यादा खतरा होता है। संगठन की मांग है कि विकलांगता पेंशन को लेकर भी सैनिकों एवं अफसरों में भेदभाव नहीं होना चाहिए।orop-09-02-2016-1455033511_storyimage

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