डेविड हेडली ने गुरुवार को मुंबई की अदालत को बताया कि 2004 में गुजरात में कथित फर्जी मुठभेड़ में मारी गई कॉलेज छात्रा इशरत जहां आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की फिदायीन थी। लश्कर कमांडर लखवी ने यह बात खुद हेडली को बताई थी।

चौपट हुआ था अभियान: हेडली ने कहा कि जकी साहब (जकी-उर-रहमान लखवी) ने कहा था कि एक महिला फिदायीन बम हमलावर की वजह से गुजरात में अभियान चौपट हो गया। इस अभियान का नेतृत्व लश्कर का सदस्य मुजम्मिल बट्ट कर रहा था।

निकम ने उगलवाया नाम: हेडली ने कहा कि उसे महिला आतंकी का नाम याद नहीं आ रहा। इस पर सरकारी वकील उज्जवल निकम ने उसे तीन नाम गिनाए, नूर जहां बेगम, इशरत जहां और मुमताज बेगम। ये सुनते ही हेडली बोला,‘हां, मैंने इशरत जहां का नाम सुना था, वह पुलिस मुठभेड़ में मारी गई थी।’

राजनीति तेज: इस बीच, हेडली के खुलासे पर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। पार्टी प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपनी नफरत की राजनीति के तहत कांग्रेस ने मुठभेड़ का राजनीतिकरण कर दिया था। कांग्रेस को अब देश से माफी मांगनी चाहिए। वहीं, कांग्रेस ने कहा कि भाजपा हेडली के बयान के आधार पर फर्जी मुठभेड़ को सही ठहराने की कोशिश कर रही है, लेकिन देश का कानून और संविधान इसकी इजाजत नहीं देते। दूसरी तरफ, इशरत की बहन मुसरत ने कहा कि मेरी बहन निर्दोष थी। यह सच कभी न कभी सामने आएगा ही।

कश्मीर आया था हेडली: 26/11 मामले में सरकारी गवाह बने डेविड हेडली ने अमेरिका से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए तीसरे दिन अदालत को बताया कि साजिद मीर से पहले मुजम्मिल बट उसके समूह का प्रमुख था। उसने यह भी बताया कि वह मुजम्मिल के साथ भारतीय सेना के खिलाफ लड़ने के लिए एक बार कश्मीर गया था।

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