वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंकिंग क्षेत्र में बड़े सुधार का संकेत दिए हैं। जेटली ने रविवार को कहा कि मैं आने वाले दिनों में बैंक क्षेत्र में कई सुधारों के बारे में घोषणा कर सकता हूं। वित्त मंत्री 29 फरवरी को आम बजट पेश करेंगे।

मेक इन इंडिया सप्ताह में में जेटली ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारत ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां सरकार बैंकिंग क्षेत्र से पूरी तरह से हट जाए। उन्होंने आगे कहा कि उद्योग में 70 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज को पेशेवर रुख देने के लिए सरकार पहले ही अपनी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत तक लाने को लेकर प्रतिबद्धता जता चुकी है। जेटली ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की जरूरत है क्योंकि उनकी भौगोलिक पहुंच के जरिये वित्तीय समावेश में बड़ी भूमिका है।

जेटली ने कहा कि सरकार इन बैंकों में किसी प्रकार के हस्तक्षेप नहीं करने और समान दूरी बनाए रखने एवं इन संस्थानों को पेशेवर तरीके से चलाने को लेकर प्रतिबद्ध है। वित्त मंत्री जेटली का बयान ऐसे समय आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का दिसंबर तिमाही में वित्तीय परिणाम काफी खराब रहा है।

बैंक आफ बड़ौदा और आईडीबीआई बैंक को भारतीय बैंक इतिहास में अब तक के सर्वाधिक नुकसान हुआ है। वहीं इंडियन ओवरसीज बैंक और देना बैंक के वित्तीय परिणाम भी खराब रहे हैं। जिन बैंकों का वित्तीय परिणाम खराब रहा है, उनके फंसे कर्ज एवं उसके एवज में प्रावधान काफी बढ़ा है। इसका कारण रिजर्व बैंक का बैंकों की संपत्ति गुणवत्ता को लेकर कड़ा रुख अपनाना है।

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार ने जो सुधार किए हैं, वह बड़ा बदलाव हैं, जेटली ने कहा कि एनडीए सरकार ने जो काम किया है, अगर हम उसे समग्र रूप से देखें तो यह बढ़ रहा है। जेटली ने कहा कि अर्थव्यवस्था ज्यादा बाजार उन्मुख होती जा रही है लेकिन सरकार बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण विनिवेश कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ा पाई। उन्होंने कहा कि तेल कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट से बची राशि का निवेश बुनियादी ढांचा निर्माण में किया जा रहा है। ग्रामीण सड़कों, विद्युतीकरण और सिंचाई में निवेश पर जोर देने की जरूरत है जिससे ग्रामीण मांग को गति मिलेगी जो पिछले दो बार के सूखे से प्रभावित है।

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