बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को देशद्रोह की धारा में गिरफ्तार करने की निंदा की है। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए जेएनयू को देशद्रोही संस्थान बताने की भी निंदा की है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार अपने इस प्रकार के घोर जनविरोधी रवैये से देश का घोर अहित कर रही है।

सोमवार को लखनऊ में जारी एक बयान में मायावती ने कहा कि कन्हैया कुमार की देशद्रोह की धारा के तहत गिरफ्तारी पहली नजर में ही गलत प्रतीत होती है। इस संगीन धारा का इस्तेमाल दिल्ली पुलिस शायद अपने स्तर से इस मामले में कन्हैया कुमार के खिलाफ इतनी जल्दी कभी नहीं करती। परन्तु इस मामले में राजनीतिक दबाव में आकर उसने देशद्रोह में उनको गिरफ्तार कर लिया है। जिसके ठोस सबूत उसके पास नहीं हैं, जैसा कि कहा जा रहा है कि कन्हैया कुमार को वीडियो में कहीं भी आपत्तिजनक नारा लगाते हुए नहीं देखा गया है।

उन्होंने कहा कि भाजपा की केन्द्र व राज्य की सरकारें लोगों के दमन के लिए कठोर टाडा कानून के गलत व राजनीतिक इस्तेमाल तक के लिए काफी बदनाम रही हैं। परन्तु अब ऐसा लगता है कि मोदी सरकार ने ‘देशद्रोही’ घोषित करने का एक नया कानूनी हथियार अपने विरोधियों के खिलाफ आजमाना शुरू कर दिया है। जेएनयू मामले में केन्द्र सरकार इससे कहीं आगे बढ़कर एक पूरे संस्थान को ही बर्बाद करने पर तुली हुई लगती है। देश की ऐसी उच्च शिक्षण संस्था, जिसकी पूरी दुनिया में ख्याति है। जिसके छात्रसंघ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र भी निर्वाचित पदाधिकारी हैं, उसे देश-विरोधी गतिविधियों का केन्द्र होने का इल्जाम लगाकर बदनाम करने का उच्च स्तर पर किया गया सरकारी प्रयास अत्यन्त दु:खद व निन्दनीय है।

बसपा नेत्री ने कहा कि इतना ही नहीं, एक तरफ तो केन्द्र सरकार जेएनयू के लोगों पर अफजल गुरु को शहीद बताने व उसके लिए कार्यक्रम आयोजित करने पर देशद्रोही बताकर उन्हें गिरफ्तार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा जम्मू-कश्मीर में उस पीडीपी के साथ फिर से सरकार बनाने में जी-जान से लगी है जिसने अफजल गुरु को शहीद बताया और उसको फांसी देने का भी विरोध किया। भाजपा बतायेगी कि यह उसकी कैसी विचित्र देशभक्ति व देश प्रेम है?
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