ब्रज की होली विश्व प्रसिद्ध है। हर बार कुछ नया होताहै। इस बार ठाकुर बांके बिहारी स्वर्ण जड़ित हिंडोले में बैठकर भक्तों संग प्राकृतिक रंगों से होली खेलेंगे। इसके लिए करीब बड़ी मात्रा में फूलों को मंगाया गया है। कोलकाता से मंगाए गए इन फूलों के रस निकाल रंग तैयार किए जाएंगे। यूं तो वसंत पंचमी के दिन से गुलाल की खोली शुरू हो गई है। लेकिन विश्वविख्यात बांके बिहारी मंदिर में 19 से 23 मार्च तक होली का मुख्य आयोजन होगा।

इसके लिए करीब डेढ़ कुंटल सूखे फूलों का रंग बड़े कढ़ावों में तैयार होगा। बांके बिहारी के सेवक महाराम सिंह ने बताया कि रंगभरनी एकादशी से मंदिर में रंग और टेसू के फूलों के रंग की होली खेली जाएगी। सबसे पहले ठा. बांके बिहारी पर रंग का शृंगार किया जाएगा। इसके बाद गोस्वामीजन भक्तों पर रंग बरसाएंगे। डेढ कुंतल टेसू के सूखे फूल कोलकाता से मंगाए जा रहे हैं। इनको बड़े कढ़ावों में गुनगुने पानी में तैयार किया जाएगा। भक्तों पर चांदी की पिचकारियों से इस रंग की बरसा होगी। इससे पहले रंगभरनी एकादशी के दिन पुष्पों की होली होगी।

गैंदा, माकरेट, गुलाब, रजनीगंधा आदि सुगंधित पुष्पों की पंखुड़ियां बरसाई जाएंगी। इसके लिए करीब एक टन फूल मंगाए गए हैं। इसके अलावा इत्र, कुमकुम, केसर, गुलाब जल भी रंग के साथ भक्तों पर बरसाया जाएगा। मंदिर के सेवायत विशाल गोस्वामी ने बताया कि रंगभरनी एकादशी के दिन ठा. बांके बिहारी गर्भगृह से बाहर जगमोहन स्वर्ण जड़ित डोला में विराजमान होकर भक्तों के साथ होली खेलेंगे। इस दिन शाम तीन बजे से मंदिर में होली की शुरुआत होगी और होलिका दहन तक अनवरत चलती रहेगी। holi-15-02-2016-1455528242_storyimage

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