साइबर सुरक्षा को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार बजट बढ़ाकर तीन गुना करने की तैयारी में है। बजट 2016-17 में इंटरनेट के जरिए होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाने, निगरानी और बचाव के लिए भी कई घोषणाएं की जा सकती हैं।

बजट में तीन गुना से ज्यादा आवंटन की है मांग
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक साइबर सुरक्षा के लिए संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से तीन गुना से ज्यादा बजट बढ़ाने की सिफारिश की गई है। गतवर्ष इस मद में 105 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था जिसमें तिगुना बढ़ोतरी की उम्मीद है। सरकार को साइबर सुरक्षा के मद्देनजर कई पहलुओं पर कदम उठाने है। ऐसे में मंत्रालय की ओर से 338 करोड़ रूपये के आवंटन की मांग को मंजूरी देकर सरकार साइबर सुरक्षा को मजबूत करेगी।

तकनीक और अत्याधुनिक उपकरण बजट बढाने की वजह
सरकार के सूत्रों की माने तो साइबर स्टाकिंग, इमेल बॉम्बिंग, डाटा डिडलिंग, मॉर्फिग, लॉजिक बम और ट्रोजन हॉर्स पर लगाम कसने के लिए इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पोंस टीम (सीइआरटी-इन) काम कर रही है। सन् 2004 में बनी इस टीम को दो भागों में बांट दिया गया, अब ज्यादा महत्वपूर्ण मामलों के लिए एनसीआईपीसी एक नई इकाई बना दी गई। यह इकाई रक्षा, दूरसंचार, परिवहन और बैंकिंग समेत अन्य क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी निभाती है। सूत्रों की माने तो तेजी से बदलती साइबर तकनीक और अत्याधुनिक उपकरणों के लिए बजट में भारी बढ़त की जरूरत है।

देश के साइबर वातावरण को सुरक्षित बनाने की जरूरत
साइबर क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक आज बैंक खातों से लेकर सरकारी तंत्र की सुरक्षा में इंटरनेट के जरिए सेंधमारी की जा सकती है। विकसित देश इंटरनेट की दुनिया में हो रहे तेज बदलाव से वाकिफ हैं और बीते दो दशकों से लगातार इसके लिए कदम उठा रहे हैं जबकि भारत ने पिछले एक दशक से साइबर सुरक्षा पर गंभीरता अपनायी है। देश में साइबर वातावरण को सुरक्षित बनाने के लिए बड़ी तादाद में लोगों को प्रशिक्षित और जागरूक किए जाने की जरूरत है। सिस्टम स्कैन करना, हैकर्स पर नजर रखना, परीक्षण के लिए उपकरणों और नई तकनीक को लगातार जानने की जरूरत है।

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