सुप्रीम कोर्ट ने सिखों से संबंधित चुटकुलों पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले याचिकाकर्ता और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) से इस बारे में उपाय सुझाने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने कहा कि वह इंटरनेट के जरिए प्रसारित किए जाने वाले जातिवादी और साम्प्रदायिक चुटकुलों पर रोक लगाने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग पर विचार करेगी।

न्यायालय ने याचिकाकर्ता हरविंदर चौधरी और डीएसजीएमसी के वकील आर एस सूरी से कहा कि वह ऐसे उपाय सुझाएं, जिससे ऐसे चुटकुलों पर रोक लगाई जा सके। शीर्ष अदालत ने इसके लिए छह सप्ताह का समय दिया है।

इससे पहले डीएसजीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सूरी ने दलील दी कि विद्यार्थियों को भी ऐसे चुटकुलों को प्रसारित करने से रोका जाना चाहिए, जो किसी समुदाय या राज्य विशेष के लोगों पर आधारित हों। समिति की दलील है कि वह पंजाब, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को निशाना बनाने वाले चुटकुलों के खिलाफ है।

गत वर्ष 30 अक्टूबर को न्यायालय ने मामले की सुनवाई को लेकर रजामंदी जताई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि वेबसाइटों पर सिख समुदाय के लोगों को मूर्ख साबित करने वाले चुटकुलों के प्रसारण पर रोक लगायी जानी चाहिए।

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