डॉक्टर नाम आते ही दिमाग से आला लिए एक इंसान याद आ जाता है। पर जरा सोचिए कि इस आला का अविष्कार क्यों हुआ। जब हाथों और कान से दिल की धड़कन को सुना और आभास किया जा सकता है तो आखिर इस यंत्र की आवश्यकता क्यों पड़ी।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जब स्टेथेस्कोप यानी आला का अविष्कार नहीं हुआ था तो डॉक्टर मरीज के सीने पर कान लगाकर दिल की धड़कन को सुना करते थे।स्टेथेस्कोप के आविष्कारक रेने लाइनेक फ्रांस के एक मशहूर डॉक्टर थे। जिन्होंने अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई अपने चाचा के अंडर की जो खुद भी एक डॉक्टर थे। आज ही के दिन उनका जन्म हुआ था।गूगल ने भी उनकी याद में एक डूडल बनाया है। उनका जन्म 17 फरवरी 1781 को हुआ था। आज उनकी 235वीं जयंती है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि लाइनेक ने स्टेथेस्कोप का आविष्कार अपने शर्मीले मिजाज के कारण किया था। स्टेथेस्कोप का आविष्कार 1816 में हुआ था।

दरअसल एक युवती का इलाज के दौरान अपना कान उसके करीब ले जाना लाइनेक को ठीक नहीं लगा। उस युवती का वजन भी ज्यादा था।

कागज के रोल को सिलेण्डरनुमा बनाकर पहली बार लाइनेक ने उस मरीज के हृदय पर रखकर धड़कन सुनने का प्रयास किया। सफल होने के बाद उनके दिमाग में इस तरह का यंत्र बनाने की सोच विकसित हुई।

इसके बाद लड़की के इस्तेमाल से जिसके एक तरफ माइक्रोस्कोप और दूसरी तरफ ईयरपीस लगाकर स्टेथोस्कोप का पहला प्रयोग किया गया।

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