बिलासपुर ।
हाईकोर्ट परिसर में निर्माणाधीन न्यायिक अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान की छत ढहने के हादसे की चश्मदीद तखतपुर निवासी अनिता से सुनामी सवाददाता की एक मुलाखात ।
छत की ढलाई का काम चल रहा था। मैं उससे पांच फीट की दूरी पर गारा पहुंचाने का काम कर रही थी और पति छत पर कामकर रहे थे। तभी जोरदार आवाज के साथ सीमेंट का गुबार उठा और चीख-पुकार मच गई। छत पर काम कर रहे एक भी आदमी नहीं दिख रहे थे। भयानक मंजर आंखों के सामने था, इसके बाद भी बदहवासी में विश्वास नहीं हो रहा था। उस पल ऐसा लगा कि मेरा सब कुछ तबाह हो गया है। मलबा हटाने में करीब एक घंटे का समय लगा, तब जाकर अपने पति को गंभीर हालत में देखी। उस समय तक यह भी पता नहीं था कि वे जिंदा हैं भी कि नहीं।यह कहना है हाईकोर्ट परिसर में निर्माणाधीन न्यायिक अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान की छत ढहने के हादसे की चश्मदीद तखतपुर निवासी अनिता कश्यप का। उसके पति सुखीराम इस हादसे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गया है और अपोलो के आईसीयू में उसका इलाज चल रहा है। अस्पताल परिसर में बैठकर अपने पति के स्वस्थ होकर निकलने का इंतजार कर रही अनिता ने सुनामी टीम को बताया कि शाम करीब 4 बजे छत की ढलाई का कार्य चल रहा था। उस समय वह भवन से लगभग 5 फीट की दूरी से छत में गारा पहुंचाने का काम कर रही थी। इस दौरानउसके पति सुखीराम छत पर डाले जा रहे गारा को बराबर करने का काम कर रहे थे। वह गारा लेने के लिए भवन से बाहर निकली ठीक उसी समय तेज आवाज के साथ छत भरभराकर गिर गई। पूरे क्षेत्र में सीमेंट का गुबार फैल गया। उस वक्त करीब 40 मजदूर काम कर रहे थे। गुबार फैलने से एकबारगी कुछ समझ में नहीं आया कि क्या हुआ। ठीक इसके बाद मजदूरों की चीख-पुकार शुरू हो गई। तब समझ आया कि पूरी छत नीचे गिर गई है और लोग गंभीर रूप से घायल होकर मलबे में दब गए हैं। चीख पुकार के बीच बाहर काम करे सभी मजदूर भवन की तरफ मदद केलिए दौड़े और जिन मजदूरों को निकाल सकते थे, उन्हें बाहर निकाला। इस दौरान उसके पति का कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था, क्योंकि वे मलबे में काफी नीचे दब गए थे। उनके बाहर निकलने में एक घंटे का समय लग गया। तब तक पता ही नहीं चल पाया था कि वे जीवित हैं कि नहीं। उसका कहना है कि मलबा हटाने के उसके पति की शरीर दिखने व हलचल होने का पता चलने के बाद ही जान में जान आई। यह एक घंटा बेहद कठिन था और पूरा समय बदहवासी में ही गुजरा। अनिता का कहना है कि ऐसी घटना उसने जिंदगी में कभी नहीं देखा था। छत गिरने के बाद का मंजर भयावह था। भगवान का शुक्र है कि इस घटना में पति बच गए।

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