सोशल मीडिया में शुक्रवार को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के वीडियो को लेकर हंगामा जारी रहा। इनमें दावे किए गए कि जो वीडियो सबसे पहले वायरल हुआ था और जिसमें जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और अन्य को कश्मीर की आजादी का नारा लगाते दिखाया गया था, हो सकता है कि उससे छेड़छाड़ हुई हो और ऑडियो क्लिप अलग से मिलाया गया हो।

यह विवादित टेप जेएनयू परिसर में नौ फरवरी को आयोजित एक कार्यक्रम का था, जिसकी वजह से पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ गई। उस टेप के सामने आने के बाद पुलिस ने कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया था और विश्वविद्यालय के छात्रों की धर-पकड़ शुरू की गई थी।

माकपा से संबद्ध छात्र संगठन एआईएसएफ के नेता और जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को कार्यक्रम में कथित रूप से राष्ट्र विरोधी नारे लगाने के लिए देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कार्यक्रम का आयोजन संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर किया गया था। लेकिन कन्हैया ने आरोपों से इनकार किया है।

पहला वीडियो क्लिप सामने आने के बाद इसका भारी विरोध हुआ और इस विरोध प्रदर्शन के विरोध में भी प्रदर्शन हुए। इसमें निशाने पर जेएनयू रहा, जहां परंपरागत रूप से वामपंथी छात्र संघों का नेतृत्व रहा है।

अब ऐसा लगता है कि कन्हैया कुमार और देशद्रोह के आरोप का सामना कर रहे अन्य लोगों ने कभी ऐसे नारे नहीं लगाए थे, जिनमें जम्मू एवं कश्मीर को भारत से आजाद करने की मांग की गई थी।

अब एक नया वीडियो क्लिप वायरल हुआ है, जिसे असली बताया जा रहा है। इसमें दिखाया गया है कि छात्र वास्तव में गरीबी, फासीवाद, संघवाद, सामंतवाद, पूंजीवाद, ब्राह्णवाद और असमानता के खिलाफ नारे लगा रहे थे।

पहले वीडियो क्लिप को टाइम्स नाउ, इंडिया टीवी और जी न्यूज सहित कुछ और टीवी चैनलों ने दिखाया था। एबीपी न्यूज ने गुरुवार शाम कथित रूप से असली वीडियो दिखाया। बाद में शुक्रवार को इंडिया टुडे ने यह कहते हुए उन वीडियोज का विश्लेषण किया कि इसके ऑडियो से छेड़छाड़ की गई है।

टाइम्स नाउ ने स्पष्ट किया है कि उसने वीडियो नहीं दिखाया है। बताया जाता है कि भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने टीवी पर बहस के दौरान अपने आईपॉड का वीडियो दिखाने की मांग की। इस पर चैनल प्रमुख अर्नब गोस्वामी ने कहा कि कुछ हिन्दी चैनलों पर चले वीडियो की जांच करनी होगी।

परस्पर विरोधी टेपों पर कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। उनका मानना है कि वामपंथ की ओर झुकाव वाले छात्र नेता को जानबूझकर फंसाने की कोशिश की गई है।

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