अपनी मां के लिए बेटों के प्यार ने एक महिला को नई जिंदगी प्रदान की और तीन बच्चों की मां शशिकला शुक्ला के ब्रैन की सर्जरी ने ना सिर्फ उनके जीवन को एक नई दिशा दी बल्कि पार्किंसन्स से पीड़ित हजारों मरीजों के लिए भी उम्मीद की एक नई किरण भी जगाई है।

एक महीने पहले तक दूसरों की सहायता के बिना एक हाथ तक न हिला पाने वाली 55 वर्षीय शशिकला अब पार्किंसन्स बीमारी से पीड़ित लोगों की आशा हैं।

पूर्वी भारत के एक न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ चिकित्सक का दावा है कि यह इस क्षेत्र में अपने तरह की पहली सर्जरी है जिसके तहत, पुन:चार्ज होने में सक्षम एक ब्रेन पेसमेकर को उनके शरीर में ट्रांस्प्लांट किया गया है।

न्यूरोलॉजिस्ट अनिर्बन दीप बनर्जी ने बताया कि शशिकला पिछले कई सालों से पार्किंसन्स की मरीज थीं। उनके पूरे शरीर में अकड़न की समस्या थी और उनके अंगों के काम करने की गति बहुत धीमी थी।

बनर्जी ने अपोलो ग्लेनियाग्लेस अस्पताल में एक टीम का नेतृत्व किया और शशिकला के शरीर में एक ब्रेन पेसमेकर प्रतिरोपित किया। इसे लगाए जाने के बाद उनके शरीर में सुधार के लक्षण भी दिख रहे हैं।

बनर्जी ने बताया कि इस ट्रांस्प्लांट के लिए शशिकला की सर्जरी आठ घंटे लंबी चली। उनके शरीर में जो पेसमेकर लगाया गया है वह लगातार करंट देता रहता है और पुन: चार्ज भी हो जाता है, इस कारण से इस पेसमेकर की जिंदगी बहुत बढ़ जाती है। यह हमारे मोबाइल की तरह चार्ज हो जाता है और मौजूदा अन्य उपकरणों में सबसे छोटा और हल्का भी है।

उन्होंने बताया कि उनके पेसमेकर को सर्वश्रेष्ठ मानकों पर परखा गया है ताकि इसके साथ होने वाले साइडइफैक्ट को न्यूनतम किया जा सके, साथ ही उन्हें कम इलाज कराना पड़े। इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने का खर्च लगभग साढ़े चौदह लाख रुपए है।

LEAVE A REPLY