Email:-sunamihindinews@gmail.com|Tuesday, November 21, 2017
You are here: Home » Breaking » बज गया चुनाव का बिगुल

बज गया चुनाव का बिगुल 




elections_04_03_2016

चार राज्यों (पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम) तथा एक केंद्र शासित प्रदेश (पुड्डुचेरी) के 824 विधानसभा क्षेत्रों में 17 करोड़ मतदाता 4 अप्रैल से 16 मई के बीच अपने नए प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान करेंगे। उनका फैसला 19 मई को सामने आएगा और तब पता चलेगा कि इस समय देश के पूर्वी एवं दक्षिण हिस्से के मतदाताओं का मूड क्या है। जाहिर होगा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में वहां नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को जो भारी समर्थन मिला था, क्या वह अब भी बरकरार है।

भाजपा के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण मुकाबला असम में है। पिछले लोकसभा चुनाव में वहां भाजपा ने 36.51 प्रतिशत वोट प्राप्त करते हुए 14 में से सात सीटें जीती थीं। 2011 के विधानसभा चुनाव में उसे 11 फीसदी वोट और 126 सदस्यीय विधानसभा में पांच सीटें मिली थीं। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 29.61 फीसदी वोट ही पा सकी, जो 2011 की तुलना में तकरीबन 10 फीसदी कम था। अब भाजपा ने असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन किया है। अगप को 2014 में 3.83 और बीपीएफ को 1.62 फीसदी वोट मिले थे। इस तरह भाजपा ने अपना आधार और मजबूत करने की कोशिश की है। असम में एक और महत्त्वपूर्ण पक्ष बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का है। इस तिकोने मुकाबले में भाजपा के लिए स्थितियां अनुकूल हैं, बशर्ते गुजरे दो वर्षों में उसके समर्थन में भारी गिरावट ना आ गई हो।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का जलवा जारी रहने के संकेत हैं। 2014 में ‘मोदी लहर” में पश्चिम बंगाल के मतदाता भी बहे थे। भाजपा वहां 16.84 प्रतिशत वोट पाने में कामयाब रही। उसने यह प्रदर्शन दोहराया तो अगली विधानसभा में उसकी मजबूत उपस्थिति हो सकती है। इसी तरह केरल में हाल में तमाम संकेत भाजपा के समर्थन में वृद्धि के रहे हैं। इसलिए संभव है कि वह पहली बार वहां की विधानसभा में सीट हासिल कर सके। तमिलनाडु में उसकी संभावनाएं बहुत उज्ज्वल नहीं हैं, इसके बावजूद उसके वोट प्रतिशत पर निगाहें रहेंगी।

कांग्रेस के नजरिए से असम सबसे खास है, हालांकि लगातार 15 साल से सत्ता में रहने के कारण वह वहां बचाव की मुद्रा में है। पश्चिम बंगाल में अपने बचे-खुचे गढ़ को बचाने की कोशिश में वह लेफ्ट फ्रंट का हाथ थामने को तैयार दिखी है, मगर उसी वाम मोर्चे से उसका केरल में मुख्य मुकाबला है। इस दोहरे रुख का उसे कितना नुकसान होगा, पर्यवेक्षक इसका अंदाजा लगाने में जुटे हुए हैं। तमिलनाडु में डीएमके मोर्चे में शामिल होकर उसने अपनी स्थिति जरूर बेहतर की है। मगर जयललिता के जादू के आगे ये गठबंधन कितना टिकेगा, फिलहाल कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

वैसे इन चुनावों में कांग्रेस या भाजपा से अधिक बड़ा दांव ममता बनर्जी, जयललिता, एम. करुणानिधि और कम्युनिस्ट पार्टियों का लगा हुआ है। अपने-अपने प्रदेशों और देश में वे कितने प्रासंगिक रहेंगे, यह इन्हीं चुनावों के नतीजों से तय होगा।

– See more at: http://naidunia.jagran.com/editorial/sampadikya-election-process-starts-682500#sthash.dG4osDqy.dpuf

Add a Comment

You Are visitor Number

विज्ञापन :- (1) किसी भी तरह की वेबसाइट बनवाने के लिए संपर्क करे Mehta Associate से मो0 न 0 :- +91-9534742205 , (2) अब टेलीविज़न के बाद वेबसाइट पर भी बुक करे स्क्रॉलिंग टेक्स्ट विज्ञापन , संपर्क करे :- +91-9431277374