मिर्गी के बारे में हमारे समाज में आम धारणा अंधविश्वास आधारित है। इस कारण कुछ लोग मिर्गी के रोगी को डॉक्टर के पास न ले जाकर विभिन्न कर्मकांडों आदि में इसका इलाज ढूंढ़ते हैं। यह बीमारी मस्तिष्क के विकार के कारण होती है। इसके बारे में विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर जानकारी दे रही हैं नीलम शुक्ला

मिर्गी तंत्रिकातंत्रीय रोग है। यह बीमारी मस्तिष्क के विकार के कारण होती है। मिर्गी का दौरा पड़ने पर शरीर अकड़ जाता है, जिसको अंग्रेजी में सीजर डिसॉर्डर भी कहते हैं। वैसे तो इस बीमारी का पता 3000 साल पहले लग चुका था, लेकिन इस बीमारी को लेकर लोगों के मन में जो गलत धारणाएं हैं, उस कारण इसके सही इलाज की बात लोग सोचते बहुत कम हैं।

मिथक हैं खतरनाक
न्यूरोसर्जन और स्पाइन ट्रस्ट इंडिया के ट्रस्टी डॉ. अर्जुन श्रीवास्तव के अनुसार, मिर्गी एक खतरनाक बीमारी है। इसमें रोगी को दौरा पड़ता है, शरीर अकड़ जाता है और मुंह से झाग आने लगता है। कुछ लोग इस बीमारी को भूत-प्रेत का साया तक मानते हैं। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कुछ लोग मिर्गी के मरीज को डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय बाबाओं के पास ले जाना उचित समझते हैं। कई बार देखा गया है कि लोग मिर्गी के मरीज को दौरा पड़ने के वक्त जूता या चप्पल सुंघाने लगते हैं। दरअसल ऐसे ही कई मिथक इस बीमारी से जुड़े हैं, जो इसके इलाज में बाधक हैं।

पागल नहीं होता मिर्गी का मरीज
मिर्गी के मरीज में दिमागी तौर पर कोई गड़बड़ी नहीं होती। वह आम लोगों की तरह ही होता है। उसकी शारीरिक प्रक्रिया भी सामान्य होती है। मिर्गी का मरीज शादी करने के योग्य होता है और वह बच्चे को जन्म देने की भी पूर्ण क्षमता रखता है। जरूरी है कि उन्हें डॉक्टर की देखरेख में रखें। मस्तिष्क का काम न्यूरॉन्स के सही तरह से सिग्नल देने पर निर्भर करता है, लेकिन जब इस काम में बाधा उत्पन्न होने लगती है तो मस्तिष्क के काम में दिक्कत आनी शुरू हो जाती है। इस कारण ऐसे मरीज को जब दौरा पड़ता है तो उसका शरीर अकड़ जाता है। कई बार वह बेहोश हो जाता है।

और भी हैं अनेक कारण
मिर्गी रोग होने के और भी कई कारण हो सकते हैं। बिजली का झटका लगना, नशीली दवाओं का अधिक सेवन करना, किसी प्रकार से सिर में तेज चोट लगना, तेज बुखार का होना आदि। इस रोग के होने का एक अन्य कारण स्नायु संबंधी रोग, ब्रेन ट्यूमर या संक्रामक ज्वर भी हो सकता है। यह रोग कई प्रकार के गलत तरह के खान-पान के कारण भी हो सकता है। दिमाग के अन्दर उपस्थित स्नायु कोशिकाओं के बीच आपसी तालमेल न होना ही मिर्गी का कारण होता है।

ऐसे संभालें रोगी को
मिर्गी के रोग का एक ही उपचार हो सकता है, वह है दौरे के समय सीजर को कंट्रोल में करना। इसके लिए एंटी एपिलेप्टिक ड्रग थेरेपी और सर्जरी कारगर होती है। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, ‘जिन लोगों पर ये दवाई काम नहीं करती है, उन्हें सर्जरी करने की सलाह दी जाती है।’ एक रिसर्च के अनुसार मिर्गी के रोगी को ज्यादा फैट वाला और कम काबरेहाइड्रेट वाला भोजन लेना चाहिए। इससे दौरे पड़ने के अंतराल में कमी आती है।

रोकथाम भी जरूरी
मिर्गी रोग होने का कारण सही तरह से पता नहीं होने की वजह से रोकथाम का भी पता सही तरह से चल नहीं पाया है। प्रेग्नेंसी के दौरान सही तरह से देखभाल करने पर शिशुओं में इस बीमारी के होने की आशंका को कम किया जा सकता है। जेनेटिक स्क्रीनिंग से बच्चे में इसके होने का पता चल जाता है। सिर में चोट लगने की आशंका को कम करने से कुछ हद तक इस रोग के होने के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का सही तरह इस्तेमाल करना चाहिए। पर्याप्त नींद और एक ही समय में सोने की आदत, तनाव से दूरी, संतुलित आहार और नियमित चेकअप द्वारा इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

क्यों पड़ता है दौरा
इस रोग के होने के सही कारण के बारे में बताना मुश्किल है। कई बार सिर पर किसी प्रकार की चोट लगने के कारण यह समस्या हो सकती है। कभी-कभी जन्म के समय मस्तिष्क में पूर्ण रूप से ऑक्सीजन का आवागमन न होने से या फिर ब्रेन टय़ूमर या दिमागी बुखार से मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा ब्रेन स्ट्रोक होने पर भी ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है। न्यूरोलॉजिकल डिजीज जैसे अल्जाइमर रोग, जेनेटिक स्थितियां भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। ड्रग एडिक्शन और एन्टीडिप्रेसेन्ट के ज्यादा इस्तेमाल होने पर भी मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

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