कुछ फिल्में अपनी अच्छी सोच के बावजूद भटक जाती हैं और एक अच्छी कहानी होने के बावजूद औसत तमगे के साथ कहीं खो-सी जाती हैं।

सोजेज सिंह की फिल्म जुबान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। फिल्म का ट्रेलर दर्शाता है कि यह संगीत पर आधारित कोई फिल्म है। बीच-बीच में आने वाले कुछ सीन्स से लगता है कि फिल्म में कुछ थ्रिल भी होगा। लेकिन देखकर ये आभास बना भी रहता है और इसकी संगीत पक्ष भी असर जगाता है, लेकिन क्लाईमैक्स तक आते-आते कहानी के उलझाव और निर्देशन का भटकाव दिमाग भन्ना देता है। वो क्यों, आइये बताते हैं।

पंजाब के गुरदासपुर से दिल्ली आया हरप्रीत सिंह उर्फ दिलशेर (विकी कौशल) कुछ बनना चाहता है। यहां की बड़ी-बड़ी इमारतें और प्रगति उसे आकर्षित करती हैं। लेकिन उसे तो गुरचरण सिंकद उर्फ गुरु (मनीष चौधरी) जैसा बनना है जो कि एक नामी और प्रभावशाली बिल्डर है। उसके कई होटल आदि हैं। गुरु ने कभी बचपन में दिलशेर को जीवन से खुद ही संघर्ष करने की नसीहत दी थी, जो आज भी याद है। न केवल याद है, बल्कि उसकी सफलता का एकमात्र मंत्र भी है।

यही वजह है कि दिलशेर, गुरू से मिलने के लिए कई तरह की योजनाएं बनाता है और किसी तरह उसके दफ्तर में नौकरी भी पा लेता है। धीरे-धीरे वह गुरू के दिल में भी जगह बनाने लगता है। गुरु उसे अपने घर में रहने के लिए जगह देता है। वह उससे काफी प्रभावित है। लेकिन ये न तो गुरु की पत्नी मंदिरा उर्फ मैंडी (मेघना मलिक) को पसंद है और न ही उसके बेटे सूर्या सिकंद (गौरव चान्ना) को।

दिलशेर के सिंकद को ज्वाइन करने के पहले दिन से वह इन दोनों की आंख में खटकने लगता है। गुरु को ये सब पता है, लेकिन वो किसी की परवाह नहीं करता। वह दिलशेर को और ज्यादा से ज्यादा जिम्मेदारियां देने लगता है। एक दिल दिलशेर की मुलाकात अमिरा (साराह जेन डियास) से होती है, जो सूर्या की दोस्त है। पहली ही मुलाकात में अमिरा, दिलशेर से काफी प्रभावित हो जाती है और उसे अपने साथियों संग एक ट्रिप के लिए निमंत्रण देती है। यहां अमिरा को पता चलता है कि दिलशेर एक बहुत अच्छा गायक भी है। और अजीब बात ये है कि गाते समय वह बिल्कुल भी नहीं हकलाता है। वह दिलशेर को चाहने लगती है। ये बात सूर्या को नहीं सुहाती और वह दिलशेर पर हमला करवा देता है।

यही नहीं एक दिल गुरु, अपने एक नए होटल की सारी जिम्मेदारी दिलेशेर को दे देता है तो सूर्या से रहा नहीं जाता। लेकिन एक दिन सब कुछ पलट जाता है। गुरू को पता चलता है कि दिलशेर उससे झूठ बोलकर यहां तक पहुंचा है। आखिर उसका मकसद क्या है…

अपने संगीत की वजह से थोड़ी सुर्खियां पा रही ये फिल्म अपनी ट्रीटमेंट के लिहाज से थ्रिलर जोन में आती है। ये बात चौंकाती है कि आखिर दिलशेर क्यों गुरू के इतना करीब जाता है। वह इसके लिए हर उल्सा-सीधा काम करने को तैयार है। शायद कहीं वह उससे अपना कोई पुराना बदला तो नहीं ले रहा। फिल्म के बीच-बीच में फ्लैशबैक में आने वाले दृश्यों से तो यही आभास होता है। ये फ्लैशबैक दिलशेर के अतीत को दर्शाते हैं, जो बहुत दुखदायी रहा है।

यही कुछ तमाम बातें हैं, जो फिल्म में उत्सुकता बनाए रखती हैं, लेकिन अंत तक आते आते फिल्म में ढेर उलझने सामने आने लगती हैं। अंत में पता चलता है कि दिलशेर केवल सिंकद को इसलिए पसंद करता है, क्योंकि वह दुनिया से लड़ना जानता है। लेकिन जब गुरू उसे अपना सब कुछ देने के लिए तैयार हो जाता है तो फिर वह वहां से चला क्यों आता है। क्या उसे सिंकद परिवार के राज पता चल गये हैं, इसलिए। इस बीच अमिरा को ये पता लगना कि दिलशेर एक अच्छा गायक, आखिर क्या साबित करता है।

बड़े ही नाटकीय ढंग से दिलशेर का जेल जाना और फिर रिहा होना। फिर रिहा होकर संगीत की तरफ मुड़ना, सिरे से परे जुरता है। इस फिल्म में अगर कुछ भाता है तो वो इसके किरदारों का अभिनय। फिल्म मसान के बाद विकी कौशल की अदाकारी में और निखार आया है। या कहें कि उन्होंने इस फिल्म मसान के मुकाबले खुलकर अभिनय किया है। मनीष चौधरी और उनके बीच के कई सीन्स भी अच्छे हैं। सिंकद के रोल में मनीष में जंचते हैं। उनकी शैली में अकड़ साफ महसूस होती है। लेकिन सारह जेन का किरदार काफी कमजोर रहा।कुल मिलाकर जुबान वो फिल्म नहीं है, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। अस्सी-नब्बे के दशक के पॉप संगीत और आज के हिप-हॉप का मिश्रण सुनना हो तो ये फिल्म बढि़या है। आधी रातों में जुगनू सा जले… गीत सुनने और फिल्मांकन की दृष्टि से बढि़या है।
सिकंद एक नामी बिल्डर है जिसका अपना एक एम्पायर है। लेकिन सिकंद को अपना आइडल मानने वाले दिलशेर के सपने टूट जाते हैं जब उसको पता चलता है कि सिकंद खोखला आदमी है। दिलशेर की जिंदगी में अमिरा (साराह जेन डियाज) संगीत के साथ एक ताजा हवा के झोंके की तरह आती है।

सितारे : विकी कौशल, मनीष चौधरी, साराह जेन डियास, मेघना मलिक, राघव चान्ना
निर्देशक-लेखक : मोजेज सिंह
निर्माता : गुनीत मोंगा, शान व्यास, मोजेज सिंह
संगीत : आशू फटक, इश्क बैक्टर, श्री डी., मनराज पाटर
गीत : वरुण ग्रोवर, आशू फटक, बाबा बुल्ले शाह, सुरजीत पाटर
पटकथा : सुमित रॉय, मोजेज सिंह
संवाद : सुमित रॉय

रेटिंग 2 स्टार

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