जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर सरकार बनने की सुगबुगाहट तेज हो गई है. पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के संकेत दिए हैं.

आलोचनाओं की परवाह नहीं
महबूबा ने कहा कि बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने से उन्हें दूसरे दलों के आलोचनों की फिक्र नहीं है. लेकिन वो केंद्र सरकार से एक संकेत चाहती है कि सरकार बनने के बाद वे घाटी में लोगों की भलाई के लिए बेहतर कदम उठाएगी.

मुफ्ती ने पीएम की तारीफ
मुफ्ती ने जम्मू की एक सभा में पीएम नरेंद्र मोदी के पाकिस्तान दौरे की जमकर तारीफ की. इस सभा में मुफ्ती ने लोगों से कहा कि जनता के हित के लिए बीजेपी से हाथ मिलाने में उनकी पार्टी को गुरेज नहीं है. इसी के मद्देनजर शुक्रवार को मुफ्ती महबूबा ने राज्यपाल एनएन वोहरा से भी मुलाकात की थी.

राज्य के विकास के लिए गठबंधन
महबूबा ने अपने दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद का नाम लेते हुए कहा, ‘उन्होंने बीजेपी के साथ एक पार्टी के तौर पर हाथ नहीं मिलाया था, बल्कि वह गठबंधन केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर के लोगों के बीच था. इसका उद्देश्य राज्य के लोगों की भलाई था.’ उन्होंने शुक्रवार को जम्मू से अपनी पार्टी का सदस्यता अभियान शुरू किया.

‘मैं हठी महिला नहीं हूं’
उन्होंने आगे कहा, ‘जब लोगों के हित का सवाल आया, मेरे पिता ने पार्टी की कभी परवाह नहीं की. वह सब कुछ से ऊपर उठे और लोगों के कल्याण के लिए बीजेपी के साथ हाथ मिलाया.’ महबूबा ने कहा कि वह कोई हठी महिला नहीं हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नेता सरकार गठन चाहते हैं, लेकिन वह ऐसा तभी करेंगी जब उन्हें महसूस होगा कि वृहद उद्देश्य की पूर्ति हो गई. यदि बीजेपी के साथ गठबंधन का उद्देश्य पूरा होता है, तो उन्हें सरकार बनाने में कोई आपत्ति नहीं है.’

राज्य में लागू है गवर्नर रूल
गौरतलब है कि 87 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में महबूबा की पार्टी पीडीपी के 27 विधायक हैं. पीडीपी ने बीजेपी के 25 सदस्यों के साथ मिलकर मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में 10 महीने तक एक गठबंधन सरकार चलाई. सईद का सात जनवरी को अचानक निधन हो गया. इसके बाद आठ जनवरी से राज्य में राज्यपाल शासन है, क्योंकि अपने पिता की उत्तराधिकारी के तौर पर देखी जा रही महबूबा ने सरकार गठन का कोई दावा पेश नहीं किया.

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