मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में हुए दंगों की जांच के लिए गठित आयोग की यूपी विधानसभा में पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव, सीओ जगत राम जोशी, डीएम कौशल राज शर्मा, एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ही दंगों के उत्तरदायी थे।

आयोग ने कहा कि 30 अगस्त को डीएम कौशल राज शर्मा द्वारा कादिर राणा व अन्य व्यक्तियों से ज्ञापन लिए जाने के कारण हिन्दू आक्रोशित हो गए। ऐसा होना ही बाद में दंगे होने का कारण बना लेकिन आयोग ने माना है कि कौशल ज्ञापन न लेते तो क्या करते? उनके पास विकल्प भी नहीं था और उस दिन कुछ भी हो सकता था।

1. कवाल की घटना से पहले मुजफ्फरनगर व शामली की घटनाओं से पश्चिमी यूपी में दोनों संप्रदायों के बीच मतभेद बहुत प्रखर हो गया था।

2. कवाल गांव में 27 अगस्त को शाहनवाज और सचिन एवं गौरव की हत्या के बाद दोनों संप्रदायों में ध्रुवीकरण के कारण दंगे हुए।

3. शासन द्वारा 27 अगस्त 2013 को रात तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी व डीएम सुरेंद्र सिंह का तबादला किया जाना। इन तबादलों से संदेश गया कि इन अधिकारियों के कहने से ही आठ लोगों को हिरासत में लिया गया था, जो एफआईआर में नामजद भी नहीं थे। अधिकारियों के तबादले से सरकार के खिलाफ एक सांप्रदाय में आक्रोश पैदा हुआ जो दंगों का मुख्य कारण बना।

4. हिरासत में ऐसे लोग लिए गए जो एफआईआर में नामजद नहीं थे। उन्हें छोड़ने से संदेश गया कि शासन प्रशासन एक खास वर्ग का पक्षधर है और उनके प्रभाव में काम कर रहा है। इससे लोगों में आक्रोश फैला।

5. शाहनवाज की हत्या में एफआईआर में सचिन व गौरव के परिवारी सदस्यों को नामजद किया जाना।

6. मुजफ्फरनगर के डीएम व एसएसपी द्वारा सचिन व गौरव की हत्याओं के संबंध में हिरासत में लिए गए 8 लोगों को गिरफ्तार करने और शाहनवाज की हत्या में दर्ज गलत नामजदगी को हटाने से इनकार करना।

7. तालिबान में एक वर्ष पूर्व घटित घटना की वीडियो क्लिप को कवाल में सचिन व गौरव की हत्या से जोड़कर वाट्सएप व एमएमएस के माध्यम से प्रसारित किया जाना।

8. डीएम और एसएसपी मुजफ्फरनगर द्वारा 30 अगस्त 2013 को शहीद चौक पर कादिर राणा व अन्य व्यक्तियों द्वारा दिए गए ज्ञापन को लिया जाना।

9. दोनों संप्रदायों के सदस्यों द्वारा भड़काऊ भाषण दिया जाना।

10. जिला प्रशासन की अक्षमता : हालांकि आयोग को गवाहों ने प्रशासन की अक्षमता को जिम्मेदार ठहराया लेकिन आयोग ने जिला प्रशासन की अक्षमता को वजह नहीं माना।

11. खुफिया एजेंसियों की विफलता और 7 सितंबर 2013 को भीड़ का सही आंकलन न कर पाना मुख्य वजह रही।

12. दंगों के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर व झूठी अफवाह फैलाने में सोशल मीडिया की भूमिका।

13. भारतीय इंटर कालेज नगला मंडौर में 7 सितंबर को हुई महापंचायत को रोकने में प्रशासन की विफलता।

14. 7 सितंबर 2013 को नगला मंडौर में आयोजित पंचायत में भाग लेने जा रहे लोगों पर बांसी कला में हमला।

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