पंचायत चुनाव को लेकर तैयार की गई मतदाता सूची में गड़बड़ी की लगातार मिल रही शिकायतों से राज्य निर्वाचन आयोग हैरान है। एक ओर जहां कई योग्य लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके, तो दूसरी ओर एक वार्ड के मतदाता का नाम दूसरे वार्ड में शामिल कर लिया गया है।

आयोग के अनुसार बिहार राज्य पंचायत निर्वाचन नियमावली में स्पष्ट प्रावधान है कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद मतदाता सूची में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं हो सकता है। ऐसे में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने अथवा किसी का नाम एक स्थान से दूसरे स्थान पर अंकित करने में आयोग असक्षम है।

आयोग के अनुसार एक वार्ड के मतदाता का नाम दूसरे वार्ड में होने की शिकायतें अधिक है। मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद अपने वार्ड में मतदान के अधिकार से वंचित न हो, इस संबंध में आयोग ने कानूनी विशेषज्ञों से सलाह मांगी है।

दो पदों के लिए मतदान से वंचित होंगे मतदाता : एक वार्ड से दूसरे वार्ड में नाम दर्ज होने से पंचायत चुनाव के छह पदों के लिए होने वाले चुनाव में दो पदों के लिए मतदान से मतदाता वंचित हो जाएंगे। ऐसे मतदाता अपने मूल वार्ड में वार्ड सदस्य एवं ग्राम कचहरी पंच के लिए मतदान नहीं कर सकेंगे। जबकि मुखिया, ग्राम कचहरी सरपंच, पंचायत समिति सदस्य एवं जिला परिषद सदस्य के लिए होने वाले मतदान में वे शामिल हो सकते हैं।

मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान हुई गड़बड़ियां : मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान वार्ड स्तर पर सूची के विखंडन के दौरान ये गड़बड़ियां हुई हैं। विधानसभा आम चुनाव के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची को आधार मानते हुए मतदाता सूची का वार्ड स्तर पर विखंडित किया गया है। पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन कर आमलोगों से आपत्ति भी मांगी गई, लेकिन उस दौरान मतदाताओं के सजग नहीं होने से सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया।

निर्वाचन आयोग कानून विशेषज्ञों की राय ले रहा है। राय मिलने के बाद उचित कार्रवाई का निर्णय लेगा।
दुर्गेश नंदन, सचिव, बिहार राज्य निर्वाचन आयोग

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