समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव की नसीहत, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रणनीति के चलते सपा विधान परिषद चुनाव में कामयाबी के झंडे गाड़ने में सफल रही। इसमें वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव की सजगता ने भी खासा अहम भूमिका निभाई। इस कारण विरोधी दल अधिकांश जगह कामयाब नहीं हो पाए। नतीजतन, समाजवादी पार्टी तीस सीटें जीत कर विधान परिषद में बहुमत पा गई। अलबत्ता, उसके सामने बसपा व निर्दलीय दो-दो सीट व कांग्रेस एक सीट जीतने में कामयाब रही।

साल 2010 में एमएलसी के लिए इन्हीं 36 सीटों पर चुनाव हुए थे, तब बसपा ने अपनी सरकार रहते हुए एकतरफा जीत हासिल करते हुए 34 सीट जीती थी। तब सपा व कांग्रेस को एक-एक सीट मिली थी। भाजपा का न तब खाता खुला था न अब खाता खुला। कांग्रेस पिछली बार एक सीट जीती थी। इस बार भी एक सीट मिली। बसपा इस बार 34 सीटों से दो सीटों पर आ गई।

कई मोर्चों पर बनाई गई रणनीति
एमएलसी चुनाव के लिए पार्टी को प्रत्याशी तय करने में खासी मुश्किलें आईं। बस्ती में मंत्री राजकिशोर के  भाई का टिकट काट कर सनी यादव को प्रत्याशी बनाया गया। समर्थन बरकरार रखने के लिए उनके भाई को निगम की बागडोर दी गई। मंत्री को पंचायती राज विभाग भी दे दिया गया। टिकट वितरण में असंतोष को शांत करने के लिए तीनांे बड़े नेताओं ने मंत्रियों को उन्हींं के इलाके की जिम्मेदारी दे दी ताकि उनकी प्रतिष्ठा भी चुनाव से जुड़ जाए। इसी का असर रहा कि पार्टी तमाम जगह कड़ी चुनौती के बाद भी जीत गई।

पार्टी ने बागियों को मनाने के लिए भी कई जतन किए। जिनको जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के दौरान निकाल दिया गया था। उन्हें वापस लेने का अभियान चला। बिजनौर से लेकर सीतापुर तक बागी पार्टी में वापस आ गए। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने ब्लाक प्रमुखों, जिला पंचायत अध्यक्षों को साफ कह दिया था कि हर हाल में सभी सीटें जीतनी हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा।

धनबल,बाहुबल से जीती सपा : भाजपा
भारतीय जनता पार्टी ने विधान परिषद चुनाव परिणाम को धन बल और बाहुबल की जीत करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि सपा ने धनबल और बाहुबल के साथ सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर विधान परिषद चुनाव में जीत दर्ज की है। उनकी कारस्तानी किसी से छिपी नहीं है। बंदूक और पैसे के दम पर वोटरों को पक्ष में मत डालने के लिए मजबूर किया गया। पाठक ने कहा कि भाजपा भाजपा कार्यकर्ता पूरी तैयारी के साथ 2017 के विधान सभा चुनाव में उतरेंगे और सरकार बनाएंगे। जनता सपा सरकार से निजात पाने के लिए छटपटा रही है।

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