देश के इकलौते नर वनमानुष (ऑरंगटान) मंगल का रविवार को कानपुर जू में निधन हो गया। वह औसत उम्र से करीब सवा छह साल ज्यादा जिया। इधर कुछ दिनों से उसकी तबियत खराब चल रही थी।

मंगल के मां-बाप दयांग और अयांग को करीब 37 साल पहले फिनलैण्ड से कानपुर जू लाया गया था। 13 नवम्बर 1979 को मंगल यहीं पैदा हुआ। उसके पैदा होने के कुछ दिन बाद ही मां-बाप का निधन हो गया। चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने ही उसे पाला।

36  साल से ऊपर कानपुर जू में लोगों का मनोरंजन करने वाले वनमानुष मंगल के निधन से चिड़ियाघर शोक  में डूब गया। चिड़ियाघर प्रशासन ने बताया कि तीन दिन पहले से उसने खाना छोड़ दिया था, उसका इलाज चल रहा था। वनमानुष की औसत आयु 30 साल होती है लेकिन मंगल 36 साल से ऊपर जिया।

भारत में अब एक मादा वनमानुष बची है जो वर्तमान में भुवनेश्वर के नन्दन कानन चिड़ियाघर में है।

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