थावे महोत्सव के आयोजन कि तैयारी शुरू

गोपालगंज : download (1) पर्यटन विभाग की तरफ से 15-16 अप्रैल को थावे महोत्सव मनाया जायेगा. महोत्सव की तैयारी प्रशासनिक स्तर पर चल रही है. इस बार थावे महोत्सव को राष्ट्रीय स्तर का महोत्सव बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अपने स्तर से पूरी ताकत लगा दी है. कलाकारों का चयन कर उन्हें निमंत्रण पत्र भी भेजा जा चुका है. थावे महोत्सव के लिए 14 समितियों का गठन किया गया है. बता दें कि थावे महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2012 में  भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी की पहल पर पर्यटन मंत्री रहे सुनील कुमार पिंटू ने की.  पहले वर्ष में महोत्सव में मनोज तिवारी जैसे कलाकार शामिल हुए. वर्ष 2013 में अनुराधा पौडवाल, मालिनी अवस्थि जैसे कलाकार आये. वर्ष 2014 में कविता पौडवाल, मालिनी अवस्थि ने महोत्सव को चार चांद लगाया, तो 2015 के महोत्सव में वाराणसी घराने से विशाल कृष्णा की कत्थक नृत्य, त्रिप्ती शाक्सा तथा भजन सम्राट अनूप जलोटा के कार्यक्रम से लोग पूरे महोत्सव का आनंद उठाते रहे.,जबकि झारखंड सराउकेला का छाउ नृत्य के लोगों ने नकार दिया था. इस बार थावे महोत्सव को और भव्य बनाने के लिए प्रशासन ने हर स्तर पर मुकम्मल तैयारी की है. महोत्सव गुरजात के गरवा से होगा शुरू : थावे महोत्सव का शुभारंभ गुजरात के गरवा से होगा. असम की बिहु, पंजाब का गटका, भागलपुर के गायक हिमांशु मोहन मिश्रा, गया की महाआरती, सरायकेला के छाउ नृत्य, मुंबई की नृत्यांगना गीतांजलि शर्मा नृत्य पेश करेंगी, तो अहमदाबाद के मेघ धनुष रॉक बैंड आकर्षण का केंद्र होगा. उसी तरह एडवेंचर स्पोर्ट्स, टेढ़िया नृत्य के अलावा पिछले चार वर्षों से उद्घोषणा कर रही सोनी सिंह समेत दो उद्घोषक शामिल होंगे. इसके अलावा राज्य युवा महोत्सव में पुरस्कृत जिले के कलाकार एवं अन्य स्थानीय कलाकार शामिल होंगे. महोत्सव में ग्रामश्री मेले का आयोजन पहली बार होगा. कृषि विभाग एवं जिला स्तर के विभागों के सहयोग से दस दिनों से ग्रामश्री मेला लगावाया जायेगा.  मेले के साथ ही पुस्तक मेला, फूडकोड लगाया जायेगा. जिसका व्यवस्था जिला आपूर्ति पदाधिकारी खान-पान समिति के सहयोग की तरफ से करायेंगे. दो फरवरी को डीएम ने थावे महोत्सव के लिए थावे महोत्सव के लिए बैठक कर विभिन्न तैयारियों की समीक्षा की थी.महोत्सव में थावे और सवेया हवाइ अड्डे पर वाटर स्पोर्ट्स, पारा गिलिडिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स का आयोजन किया जायेगा. इसके साथ ही रंगोली प्रतियोगिता एवं अन्य रोचक कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए खेलकूद समिति को जिम्मेवारी दी गयी है. थावे बिहार के प्रमुख शक्तिपीठ मां सिंहासनी का दरबार है. थावे महोत्सव भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं भोजपुरी के लुप्त होती संस्कृति पर अब तक आधारित रहा है. चाहे पद्मश्री भजन सम्राट अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल हो या मालिनी अवस्थी, तृप्ति शाक्या, कविता पौडवाल, मनोज तिवारी जैसे कलाकार भी महोत्सव में चार चांद लगा चुके हैं.इस बार प्रशासन ने महोत्सव में रॉक बैंड पार्टी जैसे कार्यक्रम को जोड़ कर पाश्चात्य संस्कृति को शामिल किया है. इतना ही नहीं पूरी तरह से भोजपुरी को महोत्सव से गायब कर दिया गया है. शास्त्रीय संगीत और भोजपुरी कल्चर  पर आधारित कार्यक्रम को भी तवज्जो नहीं दिया गया है. जिसको लेकर स्थानीय कलाकारों सहित लोगो में काफी नाराजगी देखी जा रही है नाम नही छपने के शर्त पर कुल स्थानीय कलाकारों ने बताया कि गोपालगंज और थावे कि पहचान भोजपुरी भाषा से है , जिले कि धरती के भाषा भोजपुरी कि सुगंध को एक साजिस के तहत थावे महोत्सव से दूर किया जा रहा है जो कि स्थानीय कलाकारों के साथ नाइंसाफी है , स्थानीय जिला प्रसासन सहित जनप्रतिनिधियों को भोजपुरी भाषा के विकास और स्थानीय कलाकारों कि प्रतिभा को निखारने के लिए जरूर पहल करनी चाहिए . इस पर सुनामी मिडिया ने स्थानीय विधायक श्री सुबास सिंह और जिले के प्रभारी मंत्री श्री शिवचन्द्र राम से बातचित कि .

क्या कहते है ये जनप्रतिनिधि .?

 

थावे महोत्सव में एक सोची समझी साजिस के तहत भोजपुरी के कार्यक्रम को नही रखा गया है जो कि स्थानीय कलाकारों के साथ नाइंसाफी है . मै इस मामले को यहाँ के स्थानीय विधायक  होने के नाते  बिहार के मुख्यमंत्री से विधानसभा में आवाज उठाकर थावे मंदिर के विकास सहित स्थानीय कलाकारों कि भागेदारी के लिए माँग करुगा .

सुबास सिंह , गोपालगंज भाजपा विधायक

 

 

थावे के विकास के लिए बिहार सरकार कटिबद्ध है,  थावे महोत्सव का कार्यक्रम पर्यटन विभाग द्वारा कराया जा रहा है , लेकिन मै वहाँ के प्रभारी मंत्री होने के नाते स्थानीय कलाकारों के मौका दिलाने का प्रयास करुगा , मेरी बात वहा के जिलाधिकारी जी से हुई है उन्होंने कहा है कि कुछ लोग इस कमेटी में अपनी मनमानी चला रहे थे , इसलिए नई कमेटी का गठन किया गया है , भोजपुरी मिट्टी से जुड़े कलाकरों को कार्यक्रम में जरूर मौका दिया जाएगा , स्थानीय कलाकारों के उपेक्षा कि कोइ बात नही है .

शिवचन्द्र राम

कला संस्कृति मंत्री सह प्रभारी मंत्री गोपालगंज

 

 

 

 

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