विवेक सिहं

सनामी एक्सप्रेस न्यूज

कानपुर,। बदलते मौसम चक्र के दुष्प्रभाव को वैसे तो सभी को झेलना पड़ रहा है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रभाव किसानों पर पड़ता है। जिसके चलते पहले समय से बारिश न होने के चलते खेत खाली पड़े रह गए। जिन्होनें बुआई भी कर दी है अब उन फसलों पर एक बार फिर बारिश व हवाएं मुसीबत बनती जा रही है। हालात यह है कि गेंहू की खड़ी फसलें पूर्णतया गिर चुकी हैं और वहीं मसूर, मटर की कटी हुई फसल तितर-बितर हो गई।

पिछले दिनों से लगातार तेज धूप होने के चलते जहां रवी की फसलें सूखने लगी थी तो वहीं बीते दो दिनों से बदला मौसम एक बार फिर फसलों को खराब करने में तुला हुआ है। बारिश तो कम ही हो रही है लेकिन तेज हवाएं फसलों के लिए खतरनाक होती जा रही हैं। बताते चलें कि इन दिनों रवी की फसलों में मसूर व मटर की कटाई शुरू हो गई है।

चना सरसो भी पकने की स्थित में है तो वहीं गेंहू के लिए इस समय का मौसम बहुत अनुकूल होना चाहिए, न बारिश हो और न ही अधिक तापमान। सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डा. अनिरूद्ध दुबे ने बताया कि अधिक तापमान होने से कम वायुदाब का क्षेत्र बन रहा है और तेज हवाएं चल रही हैं। इसके साथ पानी की बूदें कंडस हो रही है जिससे हल्की बारिश हो रही है। उन्होंने बताया कि इस तरह का मौसम फसलों के लिए बहुत नुकसान दायक है, 12 व 13 मार्च के बाद मौसम साफ होने की संभावना है।

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