ब्यूरो ऑफिस धर्मशाला। 24 मार्च विश्व टी.बी. दिवस के रूप में मनाया जाता है जिसके विषय पर आईटीआई दाड़ी कार्यशाला में छात्रों को टी.बी के बारे मे बताया गया। 21वीं शताब्दी में जहां हम डिजिटल भारत की और अग्रसर हैं, वहीं एक हकीकत यह भी है कि कई लोग जवानी में टी.बी. के कारण जान से हाथ धो बैठते हैं। इसका मुख्य कारण जागरूकता का आभाव व इलाज में देरी पाया गया है। यह जानकारी डॅा मनहिंदर, टी.बी. अधिकारी ने कांग़ड़ा पोलिटेक्निक में युवाओं को संबोधित करते हुए एक टी.बी. जागरुकता अभियान का शुभारम्भ करते हुए कार्यशाला में दी। इस अवसर पर मनहिंदर ने यह बताया कि यदि 2 सप्ताह से ज्यादा खांशी हेोने पर व्यक्ति को तुरंत ईलाज करवाना चाहिए। साथ ही उन्होने बताया कि इस गंभीर बिमारी का ईलाज संभव है यदि समय पर इस बिमारी का पता लगा लिया जाए। कुछ महिनों के कोर्स के बाद इस गंभीर बिमारी का खात्मा किया जा सकता है। इस अवसर पर उपस्थित समाजिक कार्यकर्ता रंजीत राणा ने कहा कि टी.बी. के मरींजों से भेदभाव न करें। उन्होंने कहा कि कुछ सावधानियां लोगो को बिमारी के दौरान रखनी चाहिए जैसे कि खांसते समंय मुंह ढकना इत्यादि। प्रधानाचार्य किरत सिंह सोहल ने कहा कि धुम्रपान टी.बी. नियत्रंण के लिए एक बड़ी बाधा बताते हुए कहा कि स्वास्थय चुनने के लिए लोगो व युवाओं को तंबाकू इत्यादि का सेवन छोड़ देना चाहिेए। इस अवसर पर जिला क्षय रोग केंद्र से शिवालिक, रमेश, गुंजन, एसटीएस ऋिषि वालिया समेत कई और लोग उपस्थित रहे।

सबके भागेदारी टी.बी का खात्मा
सबके भागेदारी टी.बी का खात्मा

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