क्षेप्त्रीय फारैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, उत्तरी रेंज, धर्मशाला ने  दवाओं एंव नषीले पदार्थो पर एक दिन का सैमिनार का आयोजन डी. आर. डी. ए., सभागार, धर्मशाला में किया। सैमिनार के मुख्य अतीथि डा0 एस. के. षुक्ला, पूर्व निदेषक, केन्द्रीय फारैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, चण्ड़ीगढ़ तथा  डा0 अरुण षर्मा, निदेषक, निदेषालय फारेंसिक विज्ञान, हिमाचल प्रदेश  जुन्गा ने ज्योति/दीपक जलाकर कार्यक्रम का षुभ आरंम्भ किया। इस सैमिनार में न्यायाधीषो/जजों, जिला न्यायवादीयों, पुलिस अधिकारीयों एंव फारैंसिक विषेषज्ञों ने भाग लिया। डा0 अरुण शर्मा, निदेषक, निदेषालय फारेंसिक विज्ञान, हिमाचल प्रदेश, जुन्गा ने आए हुए प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मादक दवाओं एवं नषीले पदार्थो के समाज में बढ़ते उपयोग पर चिन्ता जाहिर की और कहा की आज की युवा पीढ़ी नशाखोरी में डूबती जा रही है। जिसके कारण युवाओं में मानसिक व शारीरीक विकृतियां पैदा होती है जिसके फलस्वरूप आदमी अपना मानसिक सन्तुलन खो बैठता है और अपराधिक घटनाओं को अंजाम देता है। डा0 अरुण शर्मा ने बताया की नषे के कारोबारी या नषे में लिप्त युवा घिनौनें अपराध जैसे बलात्कार, मर्डर, चोरी तथा अन्य अपराधों को अंजाम देते है। इसलिए इस नषा खोरी के ऊपर अकंुष लगाना अत्यंत जरूरी है ताकि हमारी युवा पीढ़ी इस नार्को अतंकवाद में ना फंस जाए। डा0 मीनाक्षी महाजन, उपनिदेशक, क्षेत्रीय फारैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, उत्तरी रेंज, धर्मषाला ने आए हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया और कहा कि क्षेत्रीय फारैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, उत्तरी रेंज, धर्मशाला ऐसे सैमिनारों का आयोजन समय-समय पर करती आई है ताकि फारैंसिक विज्ञान की बारीकियों को समझा जा सके और पुलिस अन्वेषण में फारैंसिक के महŸव पर बल दिया जा सके। उन्होनें कहा की आज कल की युवा पीढ़ी नषे मे डूब रही है तथा युवा इसका षिकार बन रहे है।

इस सैमिनार में श्री सोहन लाल शर्मा, जिला एंव सत्र न्यायाधीश, कांगड़ा ने ‘मादक दवाओं एंव नषीले पदार्थो तथा अदालती अधिकारियों का परिप्रेक्ष्य’ के बारे में व्याख्यान दिया। श्री जी. डी. र्भागव(आई. पी. एस.), पुलिस महानिरीक्षक, उत्तरी रेंज, ने प्रतिभागियों के साथ ‘मादक दवाओं’ के ऊपर चर्चा की। डा0 एस. के. षुक्ला, पूर्व निदेषक, केन्द्रीय फारैंसिक विज्ञान, चण्ड़ीगढ़, ने ‘मादक दवाओं एंव नषीलें पदार्थो की रिर्पोट का अन्तराष्ट्रीय प्रतिरूप’ एवं दवा की जालसाजी’ के बारे में व्याख्यान दिया। श्री कोतव शर्मा, (आई. पी. एस.), क्षेत्रिय निदेषक, मादक नियंत्रण ब्यूरो चण्ड़ीगढ़, ने कानूनी परिप्रेक्ष्य अन्वेषक दृष्टीकोण और देष में दवा की तस्करी’ के बारे में व्याख्यान दिया। श्री कपिल शर्मा, सहायक निदेषक, मादक दवाओं एंव नषीले पदार्थ खंड, राज्य फारेंसिक विज्ञान प्रयोगषाला, हिमाचल प्रदेश, जुन्गा ने ‘मादक दवाओं तथा नषीलें पदार्थो के अवलोकन’ पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।

उत्तरी रेंज,फारैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला का सैमिनार
उत्तरी रेंज,फारैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला का सैमिनार

गौरतलब  है कि एन. डी. पी. एस. एक्ट 1985 में षुरू हुआ था तथा इस एक्ट के तहत नषाखोरी के लिए सख्त सजा का प्रावधान है। मादक पदार्थ पर लगाम लगाना आज के समय में बहुत मुष्किल  होता जा रहा है और मादक दवाओं एंव नषीले पदार्थो के केसों की मात्रा दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है अगर इस पर नियंत्रण नही किया गया तो हमारी आने वाली युवा पीढी मानसिक रूप से लाचार हो जाएगी। इस सैमिनार में आए हुए अधिकारियों द्वारा मादक पदार्थ के बढ़ते कारोबार पर चिन्ता व्यक्त की गई तथा इस विषय पर ठोस कदम उठाने की सख्त जरूरत पर बल दिया गया। डा0 एस के पाल, सहायक निदेषक व रेंज फाॅरेंसिक प्रवक्ता ने मंच संयोजक का कार्य किया और कहा कि आज के समय में किषोर और युवा वर्ग नषे मेें लिप्त होता जा रहा है जिसकी रोकथाम के लिए हम सभी वर्ग के लोगों, बु़िद्धजीवियों को अपने आस पड़ोस में, स्कूलों तथा काॅलेजों में बच्चों को जागरूक करने व नषे से हाने वाले दुष्प्रभावों के बारे में बताना चाहिए।

 

 

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